अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह ईरान संकट के समाधान में चीन को अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना चाहता है। यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान होने वाली अहम वार्ताओं को लेकर मीडिया से बातचीत कर रहे थे।
रुबियो ने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली बैठक में बीजिंग को इस बात के लिए राजी किया जाएगा कि वह ईरान से जुड़े मौजूदा संकट में “सक्रिय भूमिका” निभाए और क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान दे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप तीन दिवसीय दौरे पर बीजिंग पहुंचे हैं, जहां चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया—जिसे सामान्य राजनयिक प्रोटोकॉल से अलग और दुर्लभ कदम माना जा रहा है।
एयर फोर्स वन में ‘फॉक्स न्यूज’ से बातचीत के दौरान रुबियो ने कहा कि ईरान संकट वैश्विक अस्थिरता का बड़ा कारण बन चुका है और यह विशेष रूप से एशिया क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री मार्गों की निर्भरता के कारण जोखिम बढ़ा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा चीन के हित में है कि इसका समाधान निकले, इसलिए अमेरिका चाहता है कि बीजिंग ईरान को अपनी गतिविधियों पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करे, खासकर फारस की खाड़ी क्षेत्र में।
ट्रंप ने चीन रवाना होने से पहले कहा था कि वह शी जिनपिंग के साथ ईरान मुद्दे पर “लंबी बातचीत” करेंगे, हालांकि उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका को इस मामले में किसी अन्य देश की मदद की आवश्यकता नहीं है और वह किसी भी स्थिति में आगे बढ़ेगा।
रुबियो ने चीन को अमेरिका की “सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती” बताते हुए कहा कि यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंध भी है, जिसे संभालना जरूरी है ताकि वैश्विक शांति और स्थिरता बनी रहे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका चीन के उत्थान का विरोध नहीं करता, लेकिन यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि किसी देश की प्रगति दूसरे की कीमत पर हो।