विदेश में बैंक खाता, शेयर या अन्य संपत्ति रखने वाले भारतीय करदाताओं के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी राहत देने का फैसला किया है। 1 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रही वॉलंटरी फॉरेन एसेट डिस्क्लोजर स्कीम उन लोगों के लिए एक सुनहरा अवसर है, जिन्होंने अपनी आयकर रिटर्न (ITR) में विदेशी संपत्तियों या आय की जानकारी देना भूल गए थे।
सरकार द्वारा बजट 2026 में घोषित यह विशेष योजना छह महीने के लिए लागू रहेगी। इस दौरान टैक्सपेयर्स अपनी विदेशी संपत्तियों और निवेश की जानकारी स्वेच्छा से सरकार को दे सकेंगे।
क्या है फॉरेन एसेट डिस्क्लोजर स्कीम?
भारत के ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) कानून के तहत किसी भी भारतीय नागरिक को विदेश में मौजूद बैंक खाते, शेयर, निवेश या अन्य संपत्तियों की जानकारी आयकर रिटर्न के शेड्यूल FA में देना अनिवार्य है।
हालांकि कई बार छात्र, एनआरआई से लौटे लोग या छोटे निवेशक अनजाने में यह जानकारी देना भूल जाते हैं। ऐसे मामलों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सीमित अवधि के लिए यह विशेष विंडो शुरू करने का फैसला किया है।
निवेशकों को कैसे मिलेगा फायदा?
1. भारी जुर्माने और कानूनी कार्रवाई से राहत
मौजूदा नियमों के अनुसार विदेशी संपत्तियों की जानकारी छिपाने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। इस स्कीम के तहत स्वेच्छा से जानकारी देने वाले लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।
2. अघोषित विदेशी आय को वैध बनाने का मौका
योजना के तहत 1 करोड़ रुपये तक की अघोषित विदेशी आय रखने वाले करदाता निर्धारित टैक्स, अतिरिक्त टैक्स और शुल्क जमा कर अपनी संपत्ति को नियमित कर सकते हैं।
3. टैक्स नोटिस की चिंता से मुक्ति
कई लोग भविष्य में नोटिस या जांच के डर से अपनी पुरानी गलती सुधारने से भी बचते रहे हैं। यह छह महीने की विंडो उन्हें बिना अतिरिक्त तनाव के अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर देगी।
किन लोगों के लिए है यह योजना?
- विदेश में बैंक अकाउंट रखने वाले भारतीय
- विदेशी कंपनियों के शेयर या निवेश रखने वाले लोग
- विदेश में पढ़ाई या नौकरी के दौरान अकाउंट खोलने वाले व्यक्ति
- ऐसे करदाता जिन्होंने ITR में विदेशी संपत्ति की जानकारी देना भूल गए हों
विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना टैक्स अनुपालन बढ़ाने के साथ-साथ उन लोगों को राहत दे सकती है जिन्होंने जानबूझकर नहीं बल्कि अनजाने में नियमों का पालन नहीं किया था।