RBI के आज के फैसले पर टिकी करोड़ों लोगों की नजर, बढ़ेगी EMI या मिलेगी राहत? आज होगा बड़ा ऐलान

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अहम बैठक के बाद आज सुबह 10 बजे गवर्नर संजय मल्होत्रा मौद्रिक नीति के फैसलों की घोषणा करेंगे। इस ऐलान पर देशभर के करोड़ों होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वालों की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसी से तय होगा कि आने वाले समय में उनकी मासिक ईएमआई (EMI) बढ़ेगी, घटेगी या फिलहाल पहले जैसी ही रहेगी।

बाजार विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस बार आरबीआई रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रख सकता है। हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और बढ़ती महंगाई को देखते हुए केंद्रीय बैंक भविष्य के लिए सख्त संकेत दे सकता है।

महंगाई और कच्चे तेल की कीमतें बनीं बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों के अनुसार जून 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो 17 महीनों में पहली बार आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर रही। दूसरी ओर 17 जून से 31 जुलाई के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

इसी अवधि में विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 95.34 के स्तर तक पहुंच गया। इन परिस्थितियों ने महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है और यही कारण है कि आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव करने के बजाय सतर्क रुख अपना सकता है।

अक्टूबर में बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

बैंक ऑफ बड़ौदा और केयर एज के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंचती हैं और खाद्य महंगाई बढ़ती है, तो अक्टूबर 2026 की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25 प्रतिशत) की बढ़ोतरी की जा सकती है।

रॉयटर्स के सर्वे में शामिल अधिकांश अर्थशास्त्रियों ने भी अगस्त की बैठक में रेपो रेट स्थिर रहने का अनुमान जताया है, लेकिन उनका मानना है कि आरबीआई अपने बयान में भविष्य के लिए कड़ा रुख अपना सकता है।

EMI पर क्या होगा असर?

यदि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होता है, तो फिलहाल होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई में तत्काल कोई बदलाव नहीं होगा। लेकिन यदि आने वाले महीनों में रेपो रेट बढ़ाया जाता है, तो बैंक अपनी MCLR और EBLR आधारित ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। इसका सीधा असर लोन लेने वालों की मासिक ईएमआई पर पड़ेगा और उन्हें अधिक किस्त चुकानी पड़ सकती है।

जून में क्या फैसला लिया गया था?

इससे पहले जून 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही बनाए रखा था। साथ ही वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया था, जबकि महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत किया गया था।

वैश्विक हालात पर भी रहेगी नजर

भारतीय रिजर्व बैंक के फैसले पर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का भी असर पड़ रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने हाल ही में अपनी ब्याज दरों को स्थिर रखा है। ऐसे में आरबीआई के पास घरेलू आर्थिक संकेतकों के आधार पर स्वतंत्र रूप से फैसला लेने की गुंजाइश बनी हुई है।

अब सभी की नजरें आज सुबह होने वाली आरबीआई की घोषणा पर हैं, जिससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि फिलहाल लोन की ईएमआई में राहत मिलेगी या आने वाले महीनों में महंगी किस्तों के लिए तैयार रहना होगा।

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