फैक्ट्री में कांच घिसने से अरबों की मालकिन बनने तक: जानिए चीन की ‘ग्लास क्वीन’ झोउ कुनफेई की प्रेरणादायक कहानी

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एक समय फैक्ट्री में कांच घिसने का काम करने वाली लड़की… आज दुनिया की सबसे सफल बिजनेसवुमन में गिनी जाती है। यह कहानी है चीन की सेल्फ-मेड अरबपति और लांसी टेक्नोलॉजी की संस्थापक झोउ कुनफेई की, जिन्होंने गरीबी और संघर्ष को पीछे छोड़कर टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में अपना साम्राज्य खड़ा किया।

हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सम्मान में आयोजित स्टेट बैंक्वेट में झोउ कुनफेई की मौजूदगी ने दुनियाभर का ध्यान खींचा। इस कार्यक्रम में वह एप्पल के सीईओ टिम कुक और टेस्ला प्रमुख एलन मस्क के बीच बैठी नजर आईं। यह सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि उनके संघर्ष और सफलता की पहचान मानी जा रही है।

झोउ कुनफेई का जन्म चीन के हुनान प्रांत के एक छोटे गांव में हुआ था। जब वह केवल पांच साल की थीं, तब उनकी मां का निधन हो गया। वहीं उनके पिता एक हादसे में अंधे और विकलांग हो गए। आर्थिक तंगी इतनी थी कि 16 साल की उम्र में उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद वह काम की तलाश में ग्वांगडोंग पहुंचीं, जहां एक फैक्ट्री में कांच घिसने का काम शुरू किया।

दिन में फैक्ट्री में काम और रात में पढ़ाई… इसी संघर्ष के बीच उन्होंने अकाउंटिंग, कंप्यूटर ऑपरेशन और बिजनेस से जुड़े कई कोर्स किए। कुछ वर्षों बाद अपनी बचत से उन्होंने शेनझेन में एक छोटी वर्कशॉप शुरू की, जहां घड़ियों के कांच बनाए जाते थे।

मोबाइल फोन इंडस्ट्री के बढ़ते दौर में झोउ ने फोन स्क्रीन ग्लास की संभावनाओं को पहचाना और लांसी टेक्नोलॉजी की स्थापना की। उनकी कंपनी को पहले टीसीएल, फिर नोकिया और सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियों के ऑर्डर मिलने लगे।

साल 2007 में उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ आया, जब स्टीव जॉब्स ने पहला आईफोन लॉन्च किया। एप्पल को ऐसी कंपनी की जरूरत थी जो बड़े पैमाने पर फुल-ग्लास टचस्क्रीन बना सके। झोउ कुनफेई और उनकी टीम ने एप्पल इंजीनियरों के साथ मिलकर इस तकनीक को विकसित किया और पहली पीढ़ी के आईफोन के ग्लास पैनल तैयार किए।

इसके बाद लांसी टेक्नोलॉजी एप्पल की प्रमुख सप्लायर बन गई। आज कंपनी आईफोन, आईपैड और मैकबुक समेत कई प्रोडक्ट्स के लिए ग्लास बनाती है और दुनिया की सबसे बड़ी टच ग्लास पैनल निर्माता कंपनियों में शामिल है।

झोउ कुनफेई की कहानी इस बात का उदाहरण है कि कठिन हालात और सीमित संसाधन भी किसी के सपनों को रोक नहीं

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