ममता बनर्जी की अपील बेअसर! TMC के अधिकांश हारे उम्मीदवारों ने स्वीकारा जनादेश, कोर्ट नहीं जाएंगे

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर एक दिलचस्प स्थिति देखने को मिल रही है। पार्टी प्रमुख Mamata Banerjee ने चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों से परिणामों को अदालत में चुनौती देने की अपील की थी, लेकिन अधिकांश नेताओं ने इस सुझाव को नहीं माना और जनता के फैसले को स्वीकार करना बेहतर समझा।

सिर्फ 8 उम्मीदवारों ने दायर की याचिका

जानकारी के अनुसार, चुनाव में पराजित हुए TMC के 211 उम्मीदवारों में से केवल 8 प्रत्याशियों ने ही अदालत का दरवाजा खटखटाया है। वहीं, 203 उम्मीदवारों ने चुनाव परिणामों के खिलाफ कोई कानूनी चुनौती नहीं दी है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अधिकांश उम्मीदवारों का मानना है कि उनके पास चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। इसी कारण उन्होंने कानूनी लड़ाई से दूरी बनाए रखने का फैसला किया।

भवानीपुर सीट को लेकर ममता की कानूनी लड़ाई

जहां अधिकांश नेता जनादेश को स्वीकार कर चुके हैं, वहीं Mamata Banerjee ने दक्षिण कोलकाता की भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

भवानीपुर सीट राज्य के सबसे चर्चित मुकाबलों में शामिल रही, जहां ममता बनर्जी को भाजपा नेता और वर्तमान मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari से 15 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।

रिपोर्ट के अनुसार, ममता बनर्जी स्वयं कानूनी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और चुनाव परिणामों को चुनौती देने के लिए अदालत पहुंची हैं।

भाजपा की ओर से भी दायर हुईं याचिकाएं

हालांकि विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 202 सीटें जीतकर पहली बार पश्चिम बंगाल में सरकार बनाई है, इसके बावजूद पार्टी के कुछ उम्मीदवारों ने भी अपने निर्वाचन क्षेत्रों के परिणामों को चुनौती दी है।

अब तक भाजपा के 6 उम्मीदवारों ने अदालत में याचिकाएं दाखिल की हैं। इस तरह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों को लेकर कुल 14 चुनाव याचिकाएं अदालत में लंबित हैं।

राजनीतिक संकेत क्या हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अधिकांश TMC उम्मीदवारों द्वारा अदालत न जाने का फैसला यह संकेत देता है कि वे चुनावी हार को लोकतांत्रिक जनादेश के रूप में स्वीकार कर रहे हैं। दूसरी ओर, ममता बनर्जी की कानूनी लड़ाई यह दिखाती है कि पार्टी नेतृत्व कुछ सीटों पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने के पक्ष में है।

आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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