कमजोर मॉनसून से खेती पर बड़ा असर! 53.74 लाख हेक्टेयर में नहीं हो सकी खरीफ फसलों की बुआई

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देश में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की धीमी रफ्तार का सीधा असर कृषि क्षेत्र पर दिखाई देने लगा है। सामान्य से काफी कम बारिश होने के कारण खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हुई है और लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि अब तक खाली पड़ी है। धान, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों की बुआई में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिससे किसानों के साथ-साथ कृषि विशेषज्ञों की चिंता भी बढ़ गई है।

भारत मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 1 जून से 1 जुलाई 2026 के बीच देशभर में सामान्य से लगभग 38 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। मॉनसून की इस कमजोरी का सबसे अधिक असर खरीफ सीजन की बुआई पर पड़ा है, क्योंकि इन फसलों की खेती काफी हद तक समय पर होने वाली बारिश पर निर्भर करती है।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि सांख्यिकी प्रभाग की ताजा “Progress of Area Coverage under Kharif Crops” रिपोर्ट के मुताबिक, 25 जून 2026 तक देश में खरीफ फसलों की कुल बुआई का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में 53.74 लाख हेक्टेयर कम रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 25 जून 2025 तक जहां 236.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई हो चुकी थी, वहीं इस वर्ष इसी अवधि तक यह घटकर 182.72 लाख हेक्टेयर रह गई।

सबसे अधिक असर धान की खेती पर देखने को मिला है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 25 जून 2025 तक देश में 34.41 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई हुई थी, जबकि 25 जून 2026 तक यह घटकर 25.75 लाख हेक्टेयर रह गई। यानी धान की बुआई में 8.65 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट ऐसे समय में हुई है जब धान देश की सबसे महत्वपूर्ण खरीफ फसलों में शामिल है और करोड़ों किसानों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है।

दलहन फसलों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। केंद्र और राज्य सरकारें लंबे समय से दलहन उत्पादन बढ़ाने और देश को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में लगातार वृद्धि के बावजूद इस वर्ष मॉनसून की कमी का असर दलहन की बुआई पर भी पड़ा है। कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 25 जून 2026 तक दलहन की बुआई में 6.53 लाख हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में मॉनसून सामान्य नहीं हुआ, तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर व्यापक असर पड़ सकता है। इससे खाद्यान्न उत्पादन, किसानों की आय और बाजार में कृषि जिंसों की उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है। कई राज्यों में किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि बुआई का काम तेजी से पूरा किया जा सके।

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि जुलाई के पहले पखवाड़े में यदि अच्छी बारिश होती है तो कुछ क्षेत्रों में बुआई की स्थिति में सुधार संभव है। हालांकि लंबे समय तक बारिश की कमी बनी रहने पर फसल उत्पादन में गिरावट और कृषि अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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