छत्तीसगढ़ का बस्तर अपनी घनी वादियों, आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। लेकिन मानसून के मौसम में यहां मौजूद हंदवाड़ा जलप्रपात (Handawada Waterfall) पर्यटकों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं लगता। करीब 150 फीट की ऊंचाई से गिरता यह झरना बारिश के दिनों में दूधिया चादर जैसा दिखाई देता है और हर साल बड़ी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
जंगल और पहाड़ों के बीच रोमांचक सफर
हंदवाड़ा जलप्रपात तक पहुंचना अपने आप में एक रोमांचक अनुभव है। दंतेवाड़ा से लगभग 130 किलोमीटर की यात्रा के बाद गीदम, कसौली, छिंदनार और इंद्रावती नदी के विशाल पुल को पार करते हुए चेरपाल पहुंचा जाता है। यहां से करीब 5 किलोमीटर का ट्रैक घने जंगलों, पहाड़ियों और संकरे रास्तों से होकर करना पड़ता है।
यह ट्रैकिंग प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर पसंद लोगों के लिए किसी यादगार अनुभव से कम नहीं होती।
प्रकृति का अनोखा नजारा
झरने के चारों ओर फैली हरियाली, पहाड़ों के बीच गूंजती पानी की तेज आवाज और ठंडी फुहारें यहां आने वाले हर पर्यटक को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। मानसून में जलप्रपात का बहाव और भी तेज हो जाता है, जिससे इसकी खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है।
दूर-दूर से पहुंच रहे पर्यटक
पहले यह जलप्रपात केवल स्थानीय लोगों के बीच लोकप्रिय था, लेकिन अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों की वजह से ओडिशा, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों से पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं।
कई सैलानियों का कहना है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर हंदवाड़ा वॉटरफॉल की खूबसूरती देखी और फिर बाइक राइड या रोड ट्रिप के जरिए यहां आने का फैसला किया।
मानसून में बढ़ी रौनक
बारिश के मौसम में हंदवाड़ा जलप्रपात अपनी सबसे खूबसूरत छटा बिखेरता है। हालांकि, प्रशासन और स्थानीय लोग पर्यटकों से अपील करते हैं कि ट्रैकिंग के दौरान सावधानी बरतें और सुरक्षा नियमों का पालन करें, क्योंकि बारिश के दौरान रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं।
यदि आप प्रकृति, ट्रैकिंग और शांत वातावरण का आनंद लेना चाहते हैं, तो बस्तर का हंदवाड़ा जलप्रपात मानसून में घूमने के लिए बेहतरीन पर्यटन स्थलों में से एक माना जाता है।