समाज में अधर्म बढ़े तो क्या करें? गीता देती है स्पष्ट उत्तर Posted by Baliram Sajwan - November 11, 2025 “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥” (भगवद्गीता, अध्याय 4, श्लोक 7) हे भारत! जब-जब धर्म की हानि…
योग: कर्मसु कौशलम् – कर्म में कुशलता ही योग है Posted by Baliram Sajwan - November 5, 2025 भगवद्गीता का प्रसिद्ध संस्कृत वाक्यांश “योगः कर्मसु कौशलम्” गहन जीवन-दर्शन को व्यक्त करता है। इसका सरल अर्थ है – “कर्म…