ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों को जल्द ही बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिलने जा रही है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने औद्योगिक क्षेत्र ईकोटेक-12 में शहर का पहला इलेक्ट्रिक बस डिपो (E-Bus Depot) बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस परियोजना का उद्देश्य ई-बस सेवाओं को और अधिक प्रभावी, सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल बनाना है।
100 इलेक्ट्रिक बसों की क्षमता वाला होगा डिपो
प्रस्तावित ई-बस डिपो को इस तरह विकसित किया जाएगा कि यहां लगभग 100 इलेक्ट्रिक बसों को एक साथ खड़ा किया जा सके। साथ ही बसों की चार्जिंग के लिए आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। इसके लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का नियोजन विभाग ईकोटेक-12 में उपयुक्त भूमि की तलाश कर रहा है।
चार्जिंग की बड़ी समस्या होगी खत्म
वर्तमान में ग्रेटर नोएडा में चल रही ई-बसों को चार्जिंग के लिए गाजियाबाद के मोहन नगर जाना पड़ता है। इससे संचालन में अतिरिक्त समय और संसाधनों की आवश्यकता होती है। नया डिपो बनने के बाद बसों की चार्जिंग स्थानीय स्तर पर ही हो सकेगी, जिससे संचालन अधिक सुचारु और किफायती होगा।
यात्रियों की जरूरत के अनुसार बदलेंगे रूट
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की एसीईओ प्रेरणा सिंह के अनुसार, फिलहाल ग्रेटर नोएडा की सभी ई-बसें नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक संचालित हो रही हैं। लेकिन शुरुआती दिनों में इस रूट पर अपेक्षाकृत कम यात्री मिले। इसी कारण अब सर्वे के आधार पर नए रूट तय किए जा रहे हैं।
प्रस्तावित नए रूटों में:
- मोहन नगर
- वसुंधरा
- इंदिरापुरम
- कनावनी
- दादरी
- ग्रेटर नोएडा के अधिक आबादी वाले सेक्टर
को जोड़ा जा सकता है। नई समय-सारिणी और रूट प्लान अगले कुछ दिनों में जारी होने की संभावना है।
12 नए EV चार्जिंग स्टेशन भी होंगे स्थापित
ई-बस सेवा और इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए अगले 10 से 15 दिनों में ग्रेटर नोएडा ईस्ट और वेस्ट में 12 नए चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे।
प्रस्तावित चार्जिंग स्टेशन:
- कासना बस डिपो – 5 स्टेशन
- सिटी पार्क क्षेत्र – 2 स्टेशन
- ग्रेटर नोएडा वेस्ट – 5 स्टेशन
फिलहाल शहर में सिटी पार्क, एक्सपो मार्ट (नॉलेज पार्क) और तिलपता में चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हैं।
यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ
यूपीएसआरटीसी के अनुसार ई-बस सेवाएं सुबह 4:30 बजे से शुरू होती हैं और 15 से 30 मिनट के अंतराल पर उपलब्ध रहती हैं। नया डिपो और अतिरिक्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनने से बसों की उपलब्धता बढ़ेगी, संचालन बेहतर होगा और यात्रियों को अधिक सुविधाजनक तथा समयबद्ध सेवा मिल सकेगी।
यह परियोजना ग्रेटर नोएडा को स्वच्छ, हरित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।