निवेशाय ने वारी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स में ₹325 करोड़ का निवेश किया, बैटरी विनिर्माण क्षमता बढ़ाने पर फोकस

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नई दिल्ली। भारत की प्रमुख निवेश फर्म निवेशय (Niveshay) ने मंगलवार को घोषणा की कि उसने वारी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स (Waaree Energy Storage Systems) में ₹325 करोड़ के निवेश दौर का नेतृत्व किया है। यह फंडिंग वारी समूह की बैटरी निर्माण शाखा के विस्तार और ऊर्जा भंडारण (BESS) क्षमताओं को बढ़ाने के लिए की गई है।

इस निवेश का मुख्य उद्देश्य सेल और पैक विनिर्माण क्षमता को बढ़ाना, इंजीनियरिंग और सत्यापन ढांचे को मजबूत करना, और भारत सहित वैश्विक बाजारों में कंटेनरीकृत बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) के विस्तार को गति देना है।

निवेश संरचना और भागीदार

निवेशय ने बताया कि इस दौर में उसने अपने तीन फंडों —

  • संभव फंड (Category II),

  • हेजहॉग्स फंड (Category III), और

  • Niveshay WESS Fund (भारत का पहला सामूहिक निवेश वाहन – CIV)

के माध्यम से कुल ₹128 करोड़ का योगदान दिया है।

इस फंडिंग दौर के अन्य प्रमुख सह-निवेशकों में विवेक जैन (प्रबंध निदेशक, Action Tesa एवं Growthsphere) और साकेत अग्रवाल (पूर्व निदेशक, Apollo Pipes Ltd. एवं Apollo Tricot) शामिल हैं।

ऊर्जा भंडारण: भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की रीढ़

निवेशय के संस्थापक अरविंद कोठारी ने कहा —

“बैटरी भंडारण भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में केंद्रीय भूमिका निभाने जा रहा है। वारी का एकीकृत विनिर्माण मॉडल उसे घरेलू भंडारण पारिस्थितिकी तंत्र में पैमाने और तकनीकी गहराई के साथ अग्रणी बनाएगा।”

कंपनी ने कहा कि भारत का ऊर्जा भंडारण बाजार सरकारी नीतियों जैसे—

  • उन्नत सेल उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI),

  • ऊर्जा भंडारण दायित्व (ESO),

  • और ग्रिड-स्केल भंडारण के लिए व्यवहार्यता-अंतर निधि (VGF)

के चलते तीव्र गति से बढ़ रहा है।

तेजी से बढ़ता बाजार

निवेशय के अनुसार, भारत में ऊर्जा भंडारण क्षमता 2024 में जहां 0.4 GWh थी, वहीं 2030 तक यह लगभग 200 GWh तक पहुंचने की उम्मीद है।

जैसे-जैसे BESS प्रणालियां अल्पकालिक बफरिंग से लेकर बहु-दिवसीय भंडारण और हाइब्रिड संयोजन की ओर विकसित हो रही हैं, वारी का ऊर्ध्वाधर एकीकृत मॉडल उसे निर्माण, एकीकरण और दीर्घकालिक सेवा परतों में प्रतिस्पर्धी लाभ प्रदान करेगा।

वैश्विक दृष्टिकोण

रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्वभर में ऊर्जा परिवर्तन का ध्यान अब सिर्फ उत्पादन क्षमता पर नहीं, बल्कि विश्वसनीयता, लचीलापन और भंडारण तकनीकों पर केंद्रित है।
लिथियम-आयन की घटती लागत और सहायक नीतिगत ढांचे ने ऊर्जा भंडारण को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बना दिया है।

भारत का प्रक्षेप पथ अब अमेरिका और यूरोप के समान दिशा में बढ़ रहा है, जहां बहु-घंटे बैटरी प्रणालियां नवीकरणीय एकीकरण, ग्रिड स्थिरता और ऊर्जा मांग प्रबंधन को मजबूत कर रही हैं।

निवेशय एक सेबी-पंजीकृत निवेश सलाहकार और बुटीक एसेट मैनेजमेंट फर्म है, जो सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध इक्विटी में निवेश करती है।

फर्म भारत के विनिर्माण और ऊर्जा संक्रमण पारिस्थितिकी तंत्र में शुरुआती चरण के, उच्च विश्वास वाले निवेशों के लिए जानी जाती है।

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