वेनेजुएला पर मंडराते खतरे के बादल: अमेरिकी सैन्य तैनाती से बढ़ा क्षेत्रीय तनाव

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कैरेबियन सागर में हाल के दिनों में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त राज्य अमेरिका की साउदर्न कमांड (SouthCom) ने 30 अक्टूबर 2025 को एक वीडियो जारी किया, जिसमें अमेरिकी मरीन सैनिकों को वेनेजुएला के तट के पास लाइव-फायर बोट ऑपरेशन करते हुए देखा जा सकता है। नावों से गोलीबारी और तोपखाने की प्रैक्टिस के ये दृश्य यह संकेत दे रहे हैं कि क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ रहा है।

अमेरिकी सेना का दावा है कि यह अभ्यास ड्रग तस्करी रोकने और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए है, लेकिन वेनेजुएला ने इसे “खुला उकसावा” बताया है। रक्षा मंत्री व्लादिमीर पाद्रिनो लोपेज ने कहा कि अमेरिकी विमान उसके हवाई क्षेत्र से मात्र 75 किलोमीटर दूर पाए गए, जिसे “उत्पीड़न” बताया गया। जवाब में, वेनेजुएला ने अपनी तटीय रक्षा को मजबूत करते हुए 5,000 रूसी निर्मित इग्ला-एस एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलें तैनात की हैं।

यह पूरा घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में शुरू हुआ, जब सितंबर 2025 से कैरेबियन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य जमावड़ा किया गया। इसमें यूएसएस इवो जिमा एम्फीबियस रेडी ग्रुप (जिसमें यूएसएस इवो जिमा, यूएसएस सैन एंटोनियो और यूएसएस फोर्ट लॉडरडेल शामिल हैं) के साथ 4,500 नाविक और 2,200 मरीन्स तैनात किए गए हैं। साथ ही, यूएसएस ग्रेवली और यूएसएस जेसन डनहम जैसे गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर, एक न्यूक्लियर-पावर्ड पनडुब्बी, एफ-35बी स्टेल्थ फाइटर जेट्स, बी-52 बॉम्बर्स और एमक्यू-9 रीपर ड्रोन भी सक्रिय हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह दशकों में लैटिन अमेरिका में सबसे बड़ी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी है।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह तैनाती “नार्को-टेररिस्ट नेटवर्क्स” के खिलाफ है, खासकर वेनेजुएला से जुड़े ट्रेन डे अरागुआ गैंग को निशाना बनाने के लिए। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा, “वेनेजुएला से रवाना हुई ये नावें अमेरिका के लिए जहर ले जा रही थीं—हम इन्हें कुचल देंगे।” ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर लिखा, “ड्रग तस्करों को चेतावनी—अगर आप अमेरिकियों को मारने वाले ड्रग्स ले जा रहे हो, तो हम तुम्हारा पीछा कर रहे हैं!”

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इस कार्रवाई को “रिजीम चेंज की रणनीति” मान रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि “ये अतिरिक्त-न्यायिक सैन्य हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं।” वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने कहा कि “अमेरिका तेल के लिए युद्ध का बहाना बना रहा है।”

क्षेत्रीय प्रतिक्रिया भी विभाजित है—गुयाना ने अमेरिकी अभियान का समर्थन किया है, जबकि कैरिकॉम (CARICOM) ने इसे “अस्थिरता बढ़ाने वाला कदम” बताया है। कोलंबिया ने सीमा सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।

वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था पहले से ही संकट में है—हाइपरइन्फ्लेशन, तेल उत्पादन में गिरावट और अमेरिकी प्रतिबंधों से स्थिति गंभीर है। हालांकि अमेरिका ने चेवरॉन को सीमित तेल व्यापार की अनुमति दी है, लेकिन दबाव बरकरार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला की सेना संख्यात्मक रूप से कमजोर है, परंतु स्थानीय मिलिशिया और जंगल युद्ध रणनीतियाँ अमेरिकी सेना के लिए चुनौती साबित हो सकती हैं। साथ ही, तूफान सीजन और लॉजिस्टिक जटिलताएँ किसी भी सैन्य अभियान को कठिन बना सकती हैं।

स्थिति अब धीरे-धीरे शीत युद्ध जैसी तनावपूर्ण बनावट ले रही है। ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति अब लैटिन अमेरिका में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप का रूप ले चुकी है। सवाल यह है कि—क्या यह वास्तव में “ड्रग युद्ध” है या “रिजीम चेंज” की तैयारी?
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब कैरेबियन पर टिकी हैं—जहाँ शांति बनाए रखने के लिए कूटनीति ही एकमात्र रास्ता दिखाई दे रहा है।

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