उत्तराखंड शीतकालीन चारधाम यात्रा

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उत्तराखंड शीतकालीन चारधाम यात्रा

उत्तराखंड में इस बार की चारधाम यात्रा में भले ही मानसून सीजन ने अपना कहर बरपाया है लेकिन उसके बावजूद भी चारधाम यात्रा के जोश में कोई कमी देखने को नहीं मिली। इससे उत्साहित होकर उत्तराखंड सरकार अब शीतकालीन चारधाम यात्रा की तैयारी में जुटी है।

उत्तराखंड पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार , अब सरकार शीतकालीन यात्रा की तैयारी में जुट गई है। चारों धामों में कपाट बंद होने के तुरंत बाद उत्तराखंड के कई इलाकों में बर्फबारी शुरू हो गई है। विंटर टूरिज्म के साथ ही चारधाम के शीतकालीन गद्दी स्थलों को इससे जोड़कर शीतकालीन चारधाम यात्रा का कॉन्सेप्ट तैयार किया गया है। शीतकालीन यात्रा में आदि कैलाश की ओर लोगों का रुझान बढ़ा है। दक्षिण भारत के निवासी पिछले कुछ समय में आदि कैलाश को लेकर उत्साहित दिखे हैं।

शीतकालीन यात्रा की पहल ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शुरू की थी। उन्होंने शीतकाल चारधाम यात्रा के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जिसके बाद बदरी केदार मंदिर समिति और सरकार ने भी शीतकालीन यात्रा को लेकर गंभीरता दिखाई। साल 2023 में पहली बार शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने ही शीतकालीन चारधाम यात्रा शुरू की थी। इसके बाद 8 दिसंबर 2024 को पहली बार शीतकालीन चारधाम यात्रा शुरू हुई जिसका शुभारम्भ ओंकारेश्वर मंदिर में सीएम धामी ने किया था।

शीतकाल में उत्तरकाशी के खरसाली गांव में मां यमुना की पूजा होती है। उत्तरकाशी जिले में ही भागीरथी नदी के किनारे बसे मुखबा गांव में मां गंगा की पूजा अर्चना की जाती है। इसी तरह रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में बाबा केदार की शीतकालीन पूजा होती है। वहीं, चमोली के ज्योतिर्मठ के नृसिंह मंदिर में आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी की पूजा होती है। उद्धव एवं कुबेर जी की पांडुकेश्वर में पूजाएं होती है। शीतकालीन यात्रा में इन सभी शीतकालीन प्रवास स्थलों को जोड़ा गया है।

शीतकालीन चारधाम यात्रा में भक्तों को परेशानियां भी कम होती है और ज्यादा भीड़भाड़ न होने से ट्रैफिक की समस्या भी नहीं रहती। इतना ही नहीं इस दौरान शीतकालीन प्रवास स्थलों के आसपास की लोकेशन्स को भी एक्सप्लोर किया जा सकता है। उखीमठ के पास तुंगनाथ, देवरियाताल, त्रियुगीनारायण जैसे डेस्टिनेशन हैं। इन जगहों पर जाकर सर्दियों का लुत्फ उठाया जा सकता है। जोशीमठ एक हिल स्टेशन है जिसके पास औली जैसा विंटर डेस्टिनेशन है। औली में सर्दियों में विंटर गेम्स होते हैं। इसके अलावा यहां बर्फबारी का आनंद भी लिया जा सकता है।

उत्तराखंड पर्यटन विभाग की मानें तो शीतकालीन यात्रा 2024-25 के दौरान 77,093 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। शीतकालीन यात्रा के दौरान महज 4 महीने में ही GMVN को 12.82 करोड़ रुपए की बुकिंग मिली। पर्यटन विभाग शीतकालीन यात्रा और एडवेंचर टूरिज्म को लिंक कर सर्किट बनाने की योजना तैयार की है, जिसके बाद शीतकाल में टूरिस्ट बढ़ने की संभावना है।

उत्तराखंड सीमित संसाधनों वाला राज्य है , इसलिए उत्तराखंड सरकार राज्य में 12 महीनों पर्यटन पर जोर दे रही है। इससे राज्य की आर्थिकी को बढ़ावा मिल सकेगा। 12 महीनों पर्यटन से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। अभी तक उत्तराखंड में चारधाम यात्रा, सीजनल टूरिज्म, शराब और खनन से ही राजस्व मिलता है। राज्य सरकार उत्तराखंड के अध्यात्म को टूरिज्म से जोड़कर इसे अब बढ़ावा देने की दिशा में का काम कर रही है।

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