TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह, ममता बनर्जी से दूरी बना रहे विधायक-सांसद, LoP विवाद ने बढ़ाया संकट

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) इन दिनों अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट का सामना करती नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है और अब नेता प्रतिपक्ष (LoP) के चयन को लेकर खुलकर बगावत सामने आ गई है।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कई विधायक और सांसद अब भी ममता बनर्जी के प्रति सम्मान और निष्ठा जताते हैं, लेकिन संगठनात्मक फैसलों से असहमति के कारण उनसे दूरी बनाकर चल रहे हैं। एक महिला विधायक ने कहा कि चुनाव में जीत का श्रेय पूरी तरह “दीदी” को जाता है, लेकिन उन्होंने नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर पार्टी नेतृत्व के फैसले का विरोध किया।

शुक्रवार को ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई बैठक में बेहद कम उपस्थिति ने भी पार्टी के भीतर गहराते असंतोष को उजागर कर दिया। 41 सांसदों में से केवल 5 सांसद बैठक में पहुंचे, जबकि 80 विधायकों वाली पार्टी में सिर्फ 8 विधायक ही मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में विधायक बागी खेमे के संपर्क में हैं।

इस बीच, दक्षिण 24 परगना में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर अंडे, जूते और पत्थर फेंके जाने की घटना ने नेताओं की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। कई विधायकों का कहना है कि यदि पार्टी के शीर्ष नेता सुरक्षित नहीं हैं तो जमीनी स्तर के नेताओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

पार्टी के भीतर नाराजगी का एक कारण जांच एजेंसियों की बढ़ती कार्रवाई भी बताई जा रही है। कुछ विधायकों ने आरोप लगाया है कि पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई से वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका मानना है कि कानूनी संकट की स्थिति में पार्टी नेतृत्व से अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा।

इस बीच कुछ वरिष्ठ नेताओं और उनके परिजनों पर चल रही जांच भी चर्चा का विषय बनी हुई है। अवैध संपत्तियों और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कई नेताओं के नाम सामने आने के बाद विपक्ष लगातार TMC पर हमला बोल रहा है।

पार्टी में बढ़ते असंतोष को नियंत्रित करने के लिए हाल ही में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां की गईं। डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन को राष्ट्रीय संयुक्त सचिव बनाया गया, जबकि चंद्रिमा भट्टाचार्य को राज्य अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। माना जा रहा है कि इन बदलावों का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और बागी नेताओं को साधना है।

दूसरी ओर, ममता बनर्जी नेता प्रतिपक्ष से जुड़े विवाद को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही हैं। इसके साथ ही वह और अभिषेक बनर्जी जल्द ही INDIA गठबंधन की बैठक में भी शामिल हो सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी, नेताओं पर चल रही जांच, निकायों में इस्तीफे और भ्रष्टाचार के आरोपों ने TMC को एक कठिन दौर में ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ममता बनर्जी इस संकट से पार्टी को बाहर निकाल पाती हैं या नहीं।

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