पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने राज्य में संगठनात्मक स्थिति का आकलन करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने वरिष्ठ नेता अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव को पंजाब का पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। इन नेताओं को प्रदेश की राजनीतिक और संगठनात्मक परिस्थितियों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है।
पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ समय से नेतृत्व को लेकर अंदरूनी खींचतान तेज हो गई है। पार्टी के एक वर्ग की ओर से मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वाडिंग की जगह पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को जिम्मेदारी सौंपने की मांग की जा रही है, जबकि दूसरा गुट इसके पक्ष में नहीं है। इसके अलावा वरिष्ठ नेता विजय इंदर सिंगला का नाम भी संभावित दावेदारों में चर्चा में है।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस केवल प्रदेश अध्यक्ष के पद पर ही नहीं, बल्कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा की भूमिका को लेकर भी विचार कर रही है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी नेतृत्व किसी भी बड़े फैसले से पहले जमीनी फीडबैक लेना चाहता है।
इसी उद्देश्य से अजय माकन की अगुवाई में गठित पर्यवेक्षक समिति प्रदेश के नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से बातचीत करेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर संगठनात्मक बदलावों को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
कांग्रेस के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल द्वारा जारी बयान में कहा गया कि पर्यवेक्षकों की नियुक्ति का उद्देश्य पंजाब के वर्तमान राजनीतिक माहौल का मूल्यांकन करना है। पार्टी नेतृत्व ने हाल के सप्ताहों में पंजाब को लेकर दो महत्वपूर्ण बैठकें भी की हैं।
हालांकि कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को बदले जाने की अटकलों से इनकार किया है, लेकिन पर्यवेक्षकों की नियुक्ति को आगामी चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।