कर्नाटक सरकार में मंत्री Priyank Kharge द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के रजिस्ट्रेशन को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद संगठन एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। इस विवाद के बीच लोगों के मन में यह जिज्ञासा बढ़ गई है कि आखिर RSS किस तरह काम करता है, उसकी कानूनी स्थिति क्या है और उसके संचालन की प्रक्रिया कैसी है।
RSS की स्थापना वर्ष 1925 में हुई थी। संघ का दावा है कि यह एक वैचारिक और स्वयंसेवी संगठन है, जिसे विभिन्न न्यायिक फैसलों में “Body of Individuals” के रूप में माना गया है। संघ की शाखाओं का संचालन स्वयंसेवक करते हैं और संगठन अपनी गतिविधियां विभिन्न आनुषंगिक संस्थाओं के माध्यम से चलाता है।
संघ का औपचारिक पंजीकरण नहीं कराया गया है। RSS प्रमुख Mohan Bhagwat का कहना है कि संगठन की स्थापना ब्रिटिश शासनकाल में हुई थी और उस समय पंजीकरण की आवश्यकता नहीं थी। स्वतंत्रता के बाद भी भारतीय कानूनों के तहत इसे पंजीकरण के बिना कार्य करने की मान्यता मिली।
संघ की फंडिंग का प्रमुख स्रोत ‘गुरु दक्षिणा’ है। हर वर्ष गुरु पूर्णिमा के अवसर पर स्वयंसेवक स्वेच्छा से आर्थिक सहयोग देते हैं। संघ का कहना है कि इसी धन से संगठन के कार्यक्रम और गतिविधियां संचालित होती हैं तथा इसका पूरा हिसाब-किताब रखा जाता है।
महात्मा गांधी की हत्या के बाद संघ पर लगे प्रतिबंध के दौरान संगठन से लिखित संविधान अपनाने को कहा गया था। इसके बाद संघ ने संविधान तैयार किया, जिसके आधार पर आज भी संगठन का संचालन होता है। सरसंघचालक को छोड़कर अन्य कई पदों पर चुनाव की व्यवस्था भी है।
RSS की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) है, जिसकी बैठक हर वर्ष आयोजित की जाती है। इसके अलावा अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल, प्रांत और क्षेत्र स्तर की बैठकों के माध्यम से संगठन अपने निर्णय और योजनाएं तय करता है।