अमेरिका के सबसे महंगे शहरों में शामिल न्यूयॉर्क में किरायेदारों को बड़ी राहत मिली है। शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने अपना प्रमुख चुनावी वादा पूरा करते हुए रेंट स्टेबलाइजेशन नियम के तहत आने वाले करीब 10 लाख अपार्टमेंट्स का किराया नहीं बढ़ाने का फैसला लागू कर दिया है। इस प्रस्ताव को वोटिंग के बाद मंजूरी मिल गई, जिसे ममदानी की बड़ी राजनीतिक जीत माना जा रहा है।
चुनाव अभियान के दौरान जोहरान ममदानी ने बढ़ती महंगाई और न्यूयॉर्क में लगातार बढ़ रहे किराए को अपना मुख्य मुद्दा बनाया था। उन्होंने आम लोगों को राहत देने और आवास को अधिक किफायती बनाने का वादा किया था। अब रेंट फ्रीज के फैसले के साथ उन्होंने अपने सबसे बड़े वादों में से एक को पूरा कर दिया है।
इस फैसले के तहत रेंट स्टेबलाइजेशन कानून के दायरे में आने वाले लगभग 10 लाख घरों का किराया फिलहाल नहीं बढ़ाया जाएगा। इससे लाखों किरायेदारों को राहत मिलेगी, जबकि मकान मालिकों के कुछ संगठनों ने इस फैसले का विरोध किया है। वोटिंग से पहले रेंट गाइडलाइंस बोर्ड के एक सदस्य ने इस्तीफा देते हुए आरोप लगाया कि बोर्ड निष्पक्ष तरीके से फैसले नहीं ले रहा और पहले से तय एजेंडे पर काम कर रहा है।
हालांकि, शहर के बाकी इलाकों में किराए लगातार बढ़ रहे हैं। हाल के आंकड़ों के मुताबिक, मैनहैटन में एक अपार्टमेंट का औसत मासिक किराया पहली बार 5,000 डॉलर से ऊपर पहुंच गया है। वहीं, खाली अपार्टमेंट्स की दर घटकर 1.55 प्रतिशत रह गई है, जो पिछले छह वर्षों का सबसे निचला स्तर है। इससे साफ है कि ऊंचे किराए के बावजूद आवास की मांग बनी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती महंगाई और आवास की लागत न्यूयॉर्क की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। इसी मुद्दे को केंद्र में रखकर जोहरान ममदानी ने चुनाव जीता था और अब किराया स्थिर रखने का फैसला उनके चुनावी एजेंडे को अमल में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।