UP BJP में बड़ा प्रयोग! क्या पहली बार गैर-मुस्लिम बनेगा अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष?

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उत्तर प्रदेश भाजपा में संगठन विस्तार के बाद अब सबकी नजर उन पदों पर है, जिनके नामों की घोषणा अभी बाकी है। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष को लेकर हो रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, भाजपा इस बार परंपरा से हटकर किसी गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के नेता को यह जिम्मेदारी देने पर विचार कर रही है।

हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपनी नई टीम का अधिकांश हिस्सा घोषित कर दिया था, लेकिन अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष और प्रदेश मीडिया टीम के नाम अभी घोषित नहीं किए गए हैं। इसी बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि भाजपा इस पद पर एक नया राजनीतिक प्रयोग कर सकती है।

अब तक मुस्लिम नेता ही संभालते रहे हैं जिम्मेदारी

भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा की कमान अब तक मुस्लिम नेताओं के हाथ में रही है। वर्तमान में बासित अली इस मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष हैं। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व इस बार संगठन में नए सामाजिक समीकरण बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

बताया जा रहा है कि भाजपा गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय से किसी चेहरे को आगे लाकर चुनाव से पहले नए वर्गों तक अपनी पहुंच मजबूत करना चाहती है।

सिख नेता की दावेदारी सबसे मजबूत

सूत्रों के अनुसार, यदि यह प्रयोग होता है तो किसी सिख नेता को अल्पसंख्यक मोर्चे की कमान सौंपी जा सकती है। भाजपा का मानना है कि उत्तर प्रदेश में सिख समुदाय की अच्छी मौजूदगी वाले इलाकों, खासकर लखीमपुर खीरी और पीलीभीत जैसे जिलों में इसका सकारात्मक संदेश जा सकता है।

पार्टी यह भी मानती है कि सिख समुदाय को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देकर उनकी भागीदारी को और मजबूत किया जा सकता है।

पंजाब तक जाएगा राजनीतिक संदेश

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि भाजपा किसी सिख नेता को अल्पसंख्यक मोर्चे का अध्यक्ष बनाती है, तो इसका संदेश केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पंजाब की राजनीति में भी इसका असर देखने को मिल सकता है। भाजपा लंबे समय से वीर बाल दिवस समेत सिख गुरुओं और सिख इतिहास से जुड़े कार्यक्रमों को प्रमुखता देती रही है।

पार्टी के भीतर भी अलग-अलग राय

हालांकि, पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर एकमत नहीं है। कुछ नेताओं का मानना है कि अल्पसंख्यक मोर्चे का नेतृत्व पहले की तरह मुस्लिम समुदाय के नेता के पास ही रहना चाहिए। ऐसे में अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व किस दिशा में लेता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

फिलहाल भाजपा ने इस विषय पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। ऐसे में गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक को मोर्चे की कमान मिलने की चर्चा फिलहाल राजनीतिक सूत्रों और अटकलों तक ही सीमित है।

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