भारतीय संगीत जगत में कई ऐसे गाने हुए हैं, जिन्होंने सिर्फ लोकप्रियता ही नहीं हासिल की, बल्कि पूरी इंडस्ट्री की सोच बदल दी। ऐसा ही एक सदाबहार गीत था ‘क्या करते थे साजना’, जिसने 37 साल पहले रिलीज होते ही ऐसा धमाल मचाया कि टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार को उसकी लोकप्रियता के दम पर एक नहीं, बल्कि तीन फिल्में बनानी पड़ीं। इस गाने ने न सिर्फ संगीत प्रेमियों का दिल जीता, बल्कि गायिका अनुराधा पौडवाल के करियर को भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।
अनुराधा पौडवाल ने एक इंटरव्यू में इस दिलचस्प किस्से का जिक्र करते हुए बताया था कि शुरुआती दौर में गुलशन कुमार कैसेट की बिक्री बढ़ाने के लिए पुराने और लोकप्रिय गानों के नए वर्जन रिकॉर्ड करवाते थे। उस समय अनुराधा ने उन्हें सुझाव दिया कि अगर नए और ओरिजिनल गाने बनाए जाएं, तो लोगों का प्यार और ज्यादा मिलेगा।
शुरुआत में गुलशन कुमार इस विचार को लेकर संशय में थे। उनका सवाल था कि आखिर ओरिजिनल गाने कौन देगा? इसके बाद अनुराधा पौडवाल ने संगीतकार आनंद-मिलिंद और गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी को साथ जोड़कर एक नई शुरुआत की। इसी सहयोग से तैयार हुआ गीत ‘क्या करते थे साजना’, जिसने रिलीज होते ही रेडियो और कैसेट मार्केट में धूम मचा दी। इसके साथ रिकॉर्ड हुआ दूसरा गाना भी सुपरहिट साबित हुआ।
इन गानों की बेमिसाल सफलता ने गुलशन कुमार को एक नया प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सोचा कि अगर इन गीतों के साथ छोटी-छोटी कहानियां जोड़ दी जाएं, तो इन्हें फिल्मों का रूप दिया जा सकता है। इसी सोच के साथ टी-सीरीज ने ‘लाल दुपट्टा मलमल का’ (1989), ‘जीना तेरी गली में’ (1991) और ‘आई मिलन की रात’ (1991) जैसी फिल्मों का निर्माण किया। इन फिल्मों के गीतों ने भी दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई और संगीत प्रेमियों के बीच लंबे समय तक लोकप्रिय रहे।
अनुराधा पौडवाल की सुरीली आवाज ने 80 और 90 के दशक में संगीत जगत पर खास छाप छोड़ी। उन्होंने अपने करियर में लगभग 9,000 गाने गाए, जिनमें करीब 1,500 भजन भी शामिल हैं। उनके अधिकांश भजन और कई सुपरहिट फिल्मी गीत टी-सीरीज के बैनर तले रिकॉर्ड किए गए। आज भी उनके गाए कई गीत संगीत प्रेमियों की पहली पसंद बने हुए हैं।