आज के डिजिटल दौर में मोबाइल और टीवी बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। कई माता-पिता बच्चे को आसानी से खाना खिलाने के लिए उसके हाथ में मोबाइल दे देते हैं या टीवी पर कार्टून चला देते हैं। शुरुआत में यह तरीका आसान लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यही आदत स्क्रीन की लत (Screen Addiction) में बदल सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बच्चों की आंखों, नींद, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, भाषा विकास और सामाजिक व्यवहार पर असर पड़ सकता है। इतना ही नहीं, स्क्रीन देखते हुए खाना खाने से बच्चे को यह भी महसूस नहीं होता कि उसने कितना खाया है, जिससे आगे चलकर खानपान से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।
अगर आपका बच्चा भी मोबाइल देखे बिना खाना खाने से मना करता है, तो डांटने या जबरदस्ती करने के बजाय कुछ आसान और सकारात्मक तरीके अपनाएं।
1. धीरे-धीरे कम करें स्क्रीन टाइम
एकदम से मोबाइल या टीवी बंद कर देने पर बच्चा चिड़चिड़ा हो सकता है या जिद करने लग सकता है। इसलिए स्क्रीन टाइम को धीरे-धीरे कम करना बेहतर तरीका माना जाता है।
क्या करें?
पहले 15-20 मिनट स्क्रीन देखने दें।
फिर हर कुछ दिनों में 2-3 मिनट कम करते जाएं।
आखिर में बिना स्क्रीन के खाना खाने की आदत विकसित करें।
इस तरह बच्चा बदलाव को आसानी से स्वीकार कर सकता है।
2. पूरे परिवार के साथ बैठकर खाना खाने की आदत बनाएं
बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने घर में देखते हैं। यदि माता-पिता भी खाना खाते समय मोबाइल इस्तेमाल करते हैं, तो बच्चा भी उसी आदत को अपनाता है।
क्या करें?
खाने की मेज पर “नो मोबाइल” नियम बनाएं।
टीवी बंद करके सभी सदस्य साथ बैठकर खाना खाएं।
परिवार के साथ बिताया गया समय बच्चे को अधिक सुरक्षित और जुड़ा हुआ महसूस कराता है।
इससे बच्चे का ध्यान स्क्रीन से हटकर परिवार की बातचीत पर जाता है।
3. कहानियां, बातचीत और खेल का सहारा लें
अगर बच्चा सिर्फ बोरियत की वजह से मोबाइल मांगता है, तो उसकी जगह कोई रोचक गतिविधि शुरू करें।
आप क्या कर सकते हैं?
बच्चे को छोटी-छोटी कहानियां सुनाएं।
उससे पूछें कि उसने आज क्या सीखा।
रंग, जानवर, फल या गिनती से जुड़े छोटे-छोटे सवाल पूछें।
खाने को मजेदार तरीके से परोसें ताकि उसकी रुचि बनी रहे।
इससे बच्चा बिना स्क्रीन के भी खाना खाने में दिलचस्पी लेने लगेगा।
स्क्रीन की लत के क्या नुकसान हो सकते हैं?
यदि बच्चा लंबे समय तक मोबाइल या टीवी पर निर्भर रहता है, तो इसके कई दुष्प्रभाव देखने को मिल सकते हैं, जैसे—
आंखों में जलन और कमजोरी
नींद की गुणवत्ता खराब होना
पढ़ाई और एकाग्रता में कमी
चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ना
शारीरिक गतिविधि कम होना
मोटापे का खतरा बढ़ना
सामाजिक और भावनात्मक विकास पर असर
माता-पिता इन बातों का भी रखें ध्यान
बच्चे के सामने खुद भी मोबाइल का कम इस्तेमाल करें।
रोजाना आउटडोर खेल और शारीरिक गतिविधियों के लिए समय निकालें।
स्क्रीन की जगह किताबें, पजल, ड्राइंग और बोर्ड गेम्स को बढ़ावा दें।
सोने से कम से कम एक घंटे पहले स्क्रीन का इस्तेमाल बंद कर दें।
बच्चे की उम्र के अनुसार स्क्रीन टाइम तय करें और उसका पालन करें।
विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं?
बाल स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे बच्चों में स्क्रीन का इस्तेमाल सीमित होना चाहिए। बच्चों को स्क्रीन की बजाय परिवार के साथ समय बिताने, खेलकूद, कहानी सुनने और रचनात्मक गतिविधियों में शामिल करना उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अधिक लाभदायक माना जाता है। यदि बच्चे में स्क्रीन की लत बहुत ज्यादा बढ़ गई है या उसके व्यवहार में बड़े बदलाव दिखाई दे रहे हैं, तो बाल रोग विशेषज्ञ या चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेना उचित रहेगा।