मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर दतिया जिले की पूरी संगठनात्मक इकाई को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। यह कार्रवाई उपचुनाव परिणामों की समीक्षा के लिए गठित दो सदस्यीय समिति की रिपोर्ट और अनुशंसाओं के आधार पर की गई है।
भाजपा ने इस फैसले के तहत जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह सहित सभी जिला पदाधिकारियों और जिला कार्यसमिति को उनके पदों से मुक्त कर दिया है। इसके साथ ही जिले में संचालित सभी मंडल, मोर्चा, प्रकोष्ठ, प्रकल्प और विभागों को भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। इसे उपचुनाव में हार के बाद पार्टी की बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई माना जा रहा है।
हार की समीक्षा के बाद लिया गया फैसला
दतिया उपचुनाव के नतीजे आने के बाद भाजपा नेतृत्व ने हार के कारणों की समीक्षा के लिए मंगलवार सुबह एक दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। इसी दिन भोपाल स्थित मुख्यमंत्री आवास पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की हाई लेवल बैठक भी हुई, जिसमें उपचुनाव की हार पर विस्तार से चर्चा की गई।
सूत्रों के मुताबिक बैठक में भीतरघात (क्रॉस वोटिंग और संगठनात्मक असंतोष) का मुद्दा प्रमुखता से उठा। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी भी बैठक में पहुंचे और उन्होंने कुछ ऑडियो रिकॉर्डिंग तथा अन्य दस्तावेजी साक्ष्य वरिष्ठ नेताओं के सामने प्रस्तुत किए। इन तथ्यों के आधार पर संगठन के भीतर कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए।
पार्षदों की भूमिका भी जांच के दायरे में
बैठक में दतिया और बरौनी क्षेत्र के कुछ पार्षदों की भूमिका को लेकर भी चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि समीक्षा प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और यदि किसी स्तर पर अनुशासनहीनता या पार्टी विरोधी गतिविधियों के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
उपचुनाव में कैसे मिली हार?
30 अगस्त को हुए दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया।
चुनाव परिणाम इस प्रकार रहे:
- घनश्याम सिंह (कांग्रेस): 66,757 वोट
- आशुतोष तिवारी (भाजपा): 60,741 वोट
- दामोदर यादव (आजाद समाज पार्टी): 22,527 वोट
मत प्रतिशत की बात करें तो:
- कांग्रेस: 44.5%
- भाजपा: 40.5%
- आजाद समाज पार्टी: 15%
यानी कुल मिलाकर लगभग 60 प्रतिशत मतदाताओं ने भाजपा के खिलाफ मतदान किया, जिसने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
संगठन में होंगे बड़े बदलाव
दतिया जिला इकाई भंग किए जाने के बाद अब पार्टी जल्द ही नए संगठनात्मक ढांचे के गठन की प्रक्रिया शुरू करेगी। भाजपा नेतृत्व का कहना है कि संगठन को और मजबूत बनाने तथा आगामी चुनावों की बेहतर तैयारी के लिए यह कदम उठाया गया है।
दतिया उपचुनाव की हार के बाद की गई यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि भाजपा चुनावी प्रदर्शन को लेकर संगठनात्मक स्तर पर सख्त रुख अपनाने के मूड में है और कमजोर प्रदर्शन या अनुशासनहीनता पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।