बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले: भारत से अमेरिका तक गूंजा दीपू के परिवार का दर्द

66 0

बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की बेरहमी की हत्या के खिलाफ दिल्ली से लेकर कोलकाता, मुंबई से लेकर भोपाल और हैदराबाद तक कई शहरों में लोग सड़कों पर उतरे और बांग्लादेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किए.

बांग्लादेश एक बार फिर से हिंसा और अस्थिरता की आग में झुलस रहा है. अल्पसंख्यक हिंदू निशाने पर हैं. पिछले कुछ दिनों में कई हिंदुओं की पीट-पीटकर हत्याएं की जा चुकी हैं. दीपू चंद्र दास को तो पीट-पीटकर मार डालने के बाद सरेआम जला दिया गया. इन घटनाओं को लेकर भारत में उबाल है. मंगलवार को दिल्ली से लेकर कोलकाता, मुंबई से लेकर भोपाल और हैदराबाद तक 10 से ज्यादा शहरों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर बांग्लादेश सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए. वहीं बांग्लादेश में भी दीपू की हत्या को लेकर प्रदर्शन हुए. उनके परिजनों ने सामने आकर इंसाफ मांगा.

कई शहरों में बांग्लादेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

दिल्ली और कोलकाता में प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प भी हुई. कई लोग घायल हो गए. दिल्ली में विहिप और बजरंग दल के सैकड़ों समर्थकों ने कड़ी सुरक्षा वाले बांग्लादेश उच्चायोग के पास अवरोधक हटा दिए जिसके बाद पुलिस से उनकी झड़प हुई. कोलकाता में सैकड़ों समर्थकों ने बांग्लादेश के उप उच्चायोग की तरफ मार्च की कोशिश की. रोकने पर झड़प हो गई. प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड तोड़ दिए. पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा.  कम से कम 12 प्रदर्शनकारी गिरफ्तार किए गए.

जम्मू से मुंबई तक इंसाफ के लिए उठी आवाज

मुंबई में भी बजरंग दल और विहिप कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश उप उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किया. बीएमसी भवन के बाहर भी 100 से अधिक कार्यकर्ताओं द्वारा इसी तरह प्रदर्शन किया गया. जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने भी दीपू की हत्या के विरोध में मंगलवार को प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि या तो हिंदुओं को भारत लाया जाए या वहां उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.

बांग्लादेश ने भारतीय उच्चायुक्त को तलब किया

भारत में बांग्लादेश के दूतावासों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए बांग्लादेश में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को मंगलवार को विदेश मंत्रालय ने तलब किया. बांग्लादेश के विदेश सचिव असद आलम सियाम ने भारतीय उच्चायुक्त को तलब किया और उस समय उप उच्चायुक्त भी मौजूद थे. विदेश मंत्रालय ने बयान में बताया कि बांग्लादेश ने भारत में अपने दूतावासों के बाहर प्रदर्शनों पर गहरी चिंता व्यक्त की है और भारत से उम्मीद है कि वह इन घटनाओं की गहन जांच करेगी और आगे ऐसी घटनाएं होने से रोकने को पर्याप्त कदम उठाएगी. पिछले 10 दिनों में यह दूसरी बार है जब वर्मा को विदेश मंत्रालय में तलब किया गया है. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के कार्यकाल में उच्चायुक्त को अलग-अलग घटनाओं के सिलसिले में कम से कम छह बार तलब किया जा चुका है.

दीपू के लिए बांग्लादेश में हिंदू संगठन सपोर्ट में उतरे

उधर बांग्लादेश में ईशनिंदा का फर्जी आरोप लगाकर सरेआम हत्या के बाद जला दिए गए दीपू चंद्र दास का परिवार इंसाफ मांगने के लिए सड़कों पर उतर आया है. उन्हें स्थानीय हिंदू संगठनों का समर्थन भी मिला है. संगठनों ने दीपू के लिए इंसाफ की मांग उठाई है. बांग्लादेश के पावना में भी दीपू के लिए प्रदर्शन हुआ है. भारत ही नहीं अमेरिका, सिंगापुर आदि देशों से भी दीपू के परिवार को सहायता के ऑफर मिले हैं.

अमेरिकी सांसदों ने भी दीपू की हत्या की निंदा की

दीपू चंद्र दास की हत्या को लेकर भारत में ही नहीं, अमेरिका में भी उबाल है. अमेरिकी सांसदों ने  भीड़ द्वारा दास की पीट-पीट हत्या की निंदा करते हुए बांग्लादेश सरकार से धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा करने और कानून का शासन बहाल करने की अपील की है. इलिनॉय से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने बांग्लादेश में बढ़ती अस्थिरता और अशांति के बीच दीपू चंद्र दास की हत्या की कड़ी निंदा की. न्यूयॉर्क की असेंबली मेंबर जेनिफर राजकुमार ने दास की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ जारी हिंसा से वह बेहद परेशान हैं. यह घटना वहां धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न और चुन-चुनकर हिंसा की चिंताजनक प्रवृत्ति को दिखाती है.

अस्तित्व की जंग लड़ रहा मीडिया, बोले संपादक

बांग्लादेश में हिंसा के दौरा मीडिया को भी नहीं बख्शा गया. ढाका में प्रोथोम आलो और द डेली स्टार अखबारों के कार्यालयों में भीड़ ने तोड़फोड़ और आगजनी की. इसे लेकर बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्रों के संपादकों ने अपनी आवाज उठाई है. संपादकों ने कहा कि देश में मीडिया अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है और अभिव्यक्ति की आजादी के बजाय अब मुख्य मुद्दा जीवित रहने का अधिकार है. डेली स्टार’ के संपादक और प्रकाशक महफूज अनम ने कहा कि ये हमले सिर्फ विरोध जताने के लिए नहीं बल्कि पत्रकारों और कर्मचारियों को जान से मारने की नीयत से किए गए थे. यह दिखाता है कि बांग्लादेश में मीडिया अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहा है.

Related Post

बांग्लादेश की झुग्गी बस्ती में लगी भीषण आग, 1500 से ज्यादा झुग्गियां जलकर हुईं राख

Posted by - November 27, 2025 0
बांग्लादेश की राजधानी ढाका के कोराइल स्लम में लगी भीषण आग ने 1500 से अधिक झुग्गियों को राख कर दिया,…

गाजा स्थिरीकरण बल के लिए संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी प्रस्ताव को रूस, चीन और अरबों से चिंता

Posted by - November 14, 2025 0
गाजा में एक अंतर्राष्ट्रीय स्थिरीकरण बल के लिए संयुक्त राष्ट्र का अधिदेश प्रदान करने के अमेरिकी प्रस्ताव को रूस, चीन…

हसीना पर आईसीटी का फैसला: बांग्लादेश में कड़ी सुरक्षा

Posted by - November 17, 2025 0
बांग्लादेश ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल पर सोमवार (17 नवंबर, 2025) को  अंतर्राष्ट्रीय अपराध…

IMF की सख्ती से पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव, जनता पर पड़ेगा 1.73 लाख करोड़ के टैक्स का बोझ

Posted by - May 16, 2026 0
आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की जनता पर महंगाई और टैक्स का दबाव अब और बढ़ने वाला है। अंतरराष्ट्रीय…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *