होर्मुज खुलते ही भारत को बड़ी राहत, 62,370 टन LNG लेकर दहेज पोर्ट पहुंचा पहला गैस शिप

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अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद भारत के लिए ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी एक बड़ी राहतभरी खबर सामने आई है। करीब साढ़े तीन महीने से खाड़ी क्षेत्र में फंसा हुआ 62,370 मीट्रिक टन लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) लेकर आ रहा सुपरटैंकर LNGC दिशा आखिरकार गुजरात के दहेज पोर्ट पर सुरक्षित पहुंच गया है।

माल्टा के झंडे वाला यह जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर भारत पहुंचने वाला पहला LNG कैरियर माना जा रहा है, जिसने हाल ही में क्षेत्र में तनाव कम होने के बाद यात्रा पूरी की है। इसके पहुंचने से देश में गैस आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं में काफी कमी आने की उम्मीद है।

मार्च से कतर में फंसा था जहाज

जानकारी के अनुसार, LNGC दिशा जहाज 1 मार्च 2026 को कतर के रास लाफान पोर्ट पहुंचा था। अगले दिन यानी 2 मार्च को इसमें 62,370 मीट्रिक टन LNG लोड की गई थी। लेकिन उसी दौरान अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा संकट के कारण जहाज अपनी यात्रा शुरू नहीं कर सका।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि जहाज के भारत पहुंचने की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बची थी। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने भी उस दौरान खाड़ी क्षेत्र में अपने जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी थी।

शांति समझौते के बाद खुला रास्ता

अमेरिका और ईरान के बीच हालिया शांति समझौते के बाद समुद्री मार्गों पर तनाव कम हुआ और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो सकी। इसके बाद 15 जून को LNGC दिशा ने अपनी यात्रा शुरू की और 19 जून को गुजरात के दहेज बंदरगाह पर पहुंच गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक जहाज का आगमन नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के सामान्य होने का संकेत भी है।

भारत को क्या होगा फायदा?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित LNG और LPG पर निर्भर करता है। ऐसे में हजारों टन LNG की यह खेप कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इससे:

  • गैस आपूर्ति में स्थिरता आएगी।
  • औद्योगिक इकाइयों को राहत मिलेगी।
  • घरेलू LPG सप्लाई पर दबाव कम होगा।
  • ऊर्जा कीमतों में संभावित अस्थिरता घट सकती है।
  • आयातकों और गैस वितरण कंपनियों को राहत मिलेगी।

दहेज पोर्ट की अहम भूमिका

गुजरात का दहेज पोर्ट भारत के प्रमुख LNG आयात केंद्रों में से एक है। यहां बड़ी मात्रा में आयातित प्राकृतिक गैस को री-गैसीफाई कर देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाता है। इसलिए LNGC दिशा का यहां पहुंचना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ऊर्जा क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में शांति बनी रहती है और होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला रहता है, तो आने वाले दिनों में अन्य फंसे हुए ऊर्जा जहाज भी अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौटने की उम्मीद बढ़ेगी।

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