1947 से 2026 तक: 27 पैसे से 102 रुपये पहुंचा पेट्रोल, जानिए भारत में तेल की पूरी कहानी

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देश में लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने एक बार फिर आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। तेल कंपनियों ने 10 दिनों में चौथी बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है। दिल्ली में पेट्रोल अब 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच चुका है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि 1947 में भारत की आजादी के समय पेट्रोल की कीमत सिर्फ 25 से 27 पैसे प्रति लीटर थी, जबकि डीजल 15 से 20 पैसे प्रति लीटर में मिलता था। यानी आज जितने पैसों में 1 लीटर पेट्रोल आता है, उतने में उस दौर में करीब 400 लीटर से ज्यादा पेट्रोल खरीदा जा सकता था।

पेट्रोल की कीमतों का सफर

  • 1947 – 27 पैसे प्रति लीटर
  • 1970 – 90 पैसे प्रति लीटर
  • 1990 – 4.20 रुपये प्रति लीटर
  • 2004 – 33.71 रुपये प्रति लीटर
  • 2008 – 51 रुपये प्रति लीटर
  • 2014 – 72.43 रुपये प्रति लीटर
  • 2026 – 102 रुपये प्रति लीटर

भारत का पहला पेट्रोल पंप

भारत में पहला पेट्रोल पंप 1928 में मुंबई में खोला गया था। उस समय पेट्रोल की कीमत सिर्फ 6 पैसे प्रति लीटर थी। उस दौर में पेट्रोल हैंडपंप की मदद से गाड़ियों में भरा जाता था और डिजिटल मशीनों की जगह बड़े गोल डायल वाले मीटर इस्तेमाल होते थे।

गैलन से लीटर तक का सफर

1947 में भारत में पेट्रोल लीटर नहीं बल्कि गैलन में बेचा जाता था। एक गैलन लगभग 4.5 लीटर के बराबर होता था। बाद में 1956 में भारत सरकार ने मीट्रिक सिस्टम लागू किया और 1 अक्टूबर 1960 से पेट्रोल लीटर में बेचा जाने लगा।

मिट्टी के तेल का दौर

20वीं सदी की शुरुआत में Burmah Shell जैसी कंपनियों का मुख्य कारोबार पेट्रोल नहीं बल्कि मिट्टी का तेल बेचना था, जिसका इस्तेमाल लालटेन जलाने में होता था। कंपनियां केरोसिन के साथ मुफ्त लालटेन भी देती थीं, जिससे उनकी बिक्री तेजी से बढ़ी।

युद्ध और पेट्रोल कूपन सिस्टम

द्वितीय विश्व युद्ध और आजादी के शुरुआती वर्षों में भारत में तेल की भारी कमी थी। उस समय पेट्रोल कूपन और कोटा सिस्टम लागू किया गया था। डॉक्टरों, अफसरों और जजों को ज्यादा पेट्रोल कूपन मिलते थे, जबकि आम लोग सीमित मात्रा में ही पेट्रोल खरीद पाते थे।

विदेशी कंपनियों से सरकारी कंपनियों तक

1970 के दशक तक भारत का तेल बाजार विदेशी कंपनियों के कब्जे में था। बाद में सरकार ने ESSO, Burmah Shell और Caltex जैसी कंपनियों का राष्ट्रीयकरण किया, जिससे HPCL और BPCL जैसी सरकारी कंपनियां अस्तित्व में आईं। वहीं इंडियन ऑयल (IOCL) आज देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी बन चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, टैक्स और वैश्विक संकटों की वजह से आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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