अयोध्या स्थित Shri Ram Janmabhoomi Mandir में चढ़ावे और दान राशि में कथित अनियमितताओं का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है, जिसमें आरोपों की अदालत की निगरानी में जांच कराने और दान राशि का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि राम मंदिर जैसे राष्ट्रीय और धार्मिक महत्व के संस्थानों में आने वाले दान की गिनती, सुरक्षा और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया है कि मंदिर में प्राप्त नकद, सोना, चांदी और अन्य चढ़ावे से जुड़े सभी दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए जाएं ताकि जांच के दौरान किसी भी सबूत से छेड़छाड़ न हो सके।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए और उसकी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाया और न्यायिक जांच की मांग की। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन किया, जो दान राशि के रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है।
एसआईटी अब तक कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है और मंदिर में दान संग्रह एवं जमा करने की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है। जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों और दान प्रबंधन से जुड़े व्यक्तियों के वित्तीय रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
वहीं, Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मंदिर की वित्तीय व्यवस्था नियमित ऑडिट प्रक्रिया के तहत संचालित होती है और अब तक किसी बड़ी अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है। ट्रस्ट का कहना है कि वह जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रहा है।
अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि अदालत याचिका पर सुनवाई स्वीकार करती है तो राम मंदिर चढ़ावा विवाद की जांच नए मोड़ पर पहुंच सकती है।