चुनाव सुधारों पर आज लोकसभा गर्माएगी, राहुल गांधी साधेंगे निशाना

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Election Reforms Debate in Lok Sabha: संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में मंगलवार को चुनाव सुधार पर चर्चा होगी. लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी इस बहस में हिस्सा लेंगे. माना जा रहा है कि वो वोट चोरी, एसआईआर जैसे मुद्दे इस दौरान उठा सकते हैं.

नई दिल्ली:

वंदे मातरम पर तीखी बहस के बाद लोकसभा में मंगलवार को चुनाव सुधार पर चर्चा होगी. सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखा वार-पलटवार होने के आसार हैं. खासकर कांग्रेस इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपना सकती है. लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी लंबे समय से वोट चोरी, वोटर लिस्ट में गड़बड़ी, SIR में गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाकर सरकार और चुनाव आयोग को घेरते रहे हैं. मंगलवार को चुनाव सुधारों पर चर्चा में राहुल गांधी भी बोलेंगे. हालांकि शुरुआत कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी करेंगे. राहुल गांधी ने हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में वोट चोरी के गंभीर आरोप लगाए थे. चुनावी गड़बड़ी का खुलासा करते हुए हाइड्रोजन बम और एटम बम फोड़ने के दावे भी किए. उन्होंने बिहार में वोटर अधिकार रैली निकालकर भी चुनावी गड़बड़ी का मुद्दा जोरशोर से उठाया था और गरीबों, दलितों और पिछड़ों के वोट काटने का आरोप मढ़ा था.

संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत में ही विपक्ष वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चर्चा की मांग पर अड़ा था. हालांकि सरकार का तर्क रहा है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है, लिहाजा एसआईआर की बजाय चुनाव सुधार पर व्यापक चर्चा कराई जा सकती है.  चर्चा के दौरान विपक्ष कई राज्यों में बीएलओ की कथित मौतों के मामले, एसआईआर की प्रक्रिया में ‘जल्दबाजी’ जैसे मुद्दे भी उठा सकता है.

वहीं सरकार की कोशिश होगी कि वो चुनाव सुधार के अपने सकारात्मक एजेंडे को सदन में रखते हुए कांग्रेस समेत विपक्ष को घेरे. चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर विपक्ष के लगातार हमलों का मुद्दा भी सत्तापक्ष उठाएगा. सत्ता पक्ष के सांसद एक देश-एक चुनाव जैसे कदमों का उल्लेख भी कर सकता है. साथ ही मतदाता सूची के डिजिटाइजेशन जैसे सुधारों को भी उठाएगा.

चुनाव सुधार बहस में आज लोकसभा गरमाएगी

भाजपा की ओर से सांसद निशिकांत दुबे, अभिजीत गंगोपाध्याय, पीपी चौधरी और संजय जायसवाल समेत वरिष्ठ सांसद हिस्सा ले सकते हैं. दो दिन की बहस के अंत में कोई वरिष्ठ मंत्री जवाब दे सकता है.

कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी और गौरव गोगोई ने इन आरोपों का जवाब दिया था. गोगोई ने कहा था कि पंडित नेहरू के योगदान पर भाजपा दाग नहीं लगा सकती. आजादी की जंग में उसका (बीजेपी) का कोई योगदान नहीं है. कांग्रेस ने ही अपने हर अधिवेशन में वंदे मातरम गाने का फैसला किया था.

सरकार पर प्रियंका गांधी का निशाना

प्रियंका गांधी ने जवाहरलाल नेहरू पर संसद में गहन चर्चा कराने की मांग की ताकि बेरोजगारी, महंगाई जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सके. आज हम राष्ट्रीय गीत पर बहस कर रहे हैं, लेकिन हमारा राष्ट्र गान भी कविता का एक अंश है. दोनों को चुनने में सबसे अहम भूमिका रवींद्रनाथ टैगोर की थी. वंदे मातरम को संविधान सभा ने स्वीकार किया था, लिहाजा इस पर सवाल उठाना न सिर्फ उन महापुरुषों का अपमान है. साथ ही यह संविधान विरोधी मंशा को भी उजागर करता है.

राहुल-प्रियंका की गैरहाज़िरी से बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

बीजेपी ने वंदे मातरम पर पीएम मोदी  के संबोधन के दौरान नेता विपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की गैरमौजूदगी का मुद्दा भी उठाया. पार्टी ने कहा कि इस घटनाक्रम में गांधी परिवार की मानसिकता को पर्दाफाश कर दिया है, उनके अंदर अपराधबोध रहा होगा.

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