NEET UG Re-Exam 2026: NTA कितना तैयार? 5 बड़े पॉइंट्स में समझिए पूरी तैयारी

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पेपर लीक विवादों के बाद 21 जून 2026 को होने जा रहे NEET UG री-एग्जाम को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार ने सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। दावा किया जा रहा है कि इस बार परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए कई नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।

1. एयरफोर्स और पैरामिलिट्री की निगरानी में परीक्षा
पहली बार NEET परीक्षा के प्रश्नपत्रों की सुरक्षित ढुलाई के लिए भारतीय वायुसेना के विमान और हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया गया है। चार दिनों में 200 से अधिक उड़ानों के जरिए प्रश्नपत्र देशभर के परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए गए। साथ ही CRPF, CISF और स्थानीय प्रशासन को भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया गया है।

2. GPS ट्रैकिंग और डिजिटल लॉक सिस्टम
प्रश्नपत्रों को हाई-टेक डिजिटल लॉक वाले बॉक्स में रखा गया है, जिन्हें रियल-टाइम GPS ट्रैकिंग से मॉनिटर किया जा रहा है। किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ होने पर कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट मिलेगा। परीक्षा केंद्रों पर CCTV निगरानी भी बढ़ा दी गई है।

3. टेलीग्राम पर अस्थायी रोक
पेपर लीक की अफवाहों और फर्जी दावों को रोकने के लिए सरकार ने 22 जून तक टेलीग्राम ऐप पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया है। साथ ही 30 जून तक मैसेज एडिट फीचर भी बंद किया गया है, ताकि परीक्षा के बाद फर्जी लीक के दावे न किए जा सकें।

4. शिकायत पोर्टल और साइबर मॉनिटरिंग
NTA ने एक विशेष शिकायत पोर्टल शुरू किया है, जहां छात्र पेपर लीक, फर्जी प्रश्नपत्र, संदिग्ध सोशल मीडिया पोस्ट या परीक्षा से जुड़ी किसी भी गड़बड़ी की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से भी शिकायत की जा सकती है।

5. छात्रों के लिए बड़े बदलाव
इस बार परीक्षा का समय 180 मिनट से बढ़ाकर 195 मिनट कर दिया गया है। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक चलेगी। उत्तर पुस्तिका में रफ कार्य के लिए पन्नों की संख्या बढ़ाई गई है और लेफ्ट-हैंडेड छात्रों की सुविधा के लिए बुकलेट डिजाइन में बदलाव किया गया है। भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए NTA 10,000 प्रश्नों वाले सुरक्षित डिजिटल प्रश्न बैंक सिस्टम पर भी काम कर रहा है।

NTA का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों को भी परीक्षा समाप्त होने तक बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग रखा गया है। एजेंसी का दावा है कि इस बार की व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत है।

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