जापान में होने वाले आइची-नागोया एशियाई खेलों से पहले भारतीय खिलाड़ियों के लिए एक अनोखा सिमुलेशन ट्रायल कराया जा रहा है। इस बार एशियाई खेलों में पारंपरिक खेल गांव नहीं होगा। खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था कंटेनर, क्रूज और अन्य वैकल्पिक माध्यमों से की जाएगी। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने खिलाड़ियों को पहले से इस माहौल का अभ्यस्त कराने की तैयारी शुरू की है।
SAI ने तैयार किया खास ‘सिमुलेशन’ प्लान
पटियाला और बेंगलुरु स्थित SAI केंद्रों में अस्थायी कंटेनर कमरे तैयार किए गए हैं। खिलाड़ियों को इनमें रात बिताने का अनुभव कराया जा रहा है, ताकि जापान पहुंचने के बाद उन्हें किसी तरह की असहजता या मानसिक दबाव का सामना न करना पड़े।
SAI के उप महानिदेशक और NSNIS पटियाला के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक विनीत कुमार के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य खिलाड़ियों को पहले से नए तरह के आवास का अनुभव देना है, जिससे उनका पूरा ध्यान प्रतियोगिता पर रहे।
छोटे कंटेनर में रहना कितना मुश्किल?
बड़े कमरों और खेल उपकरणों के लिए पर्याप्त जगह के आदी खिलाड़ियों के लिए शुरुआत में कंटेनर में रहना थोड़ा अलग अनुभव रहा। हालांकि, दो बार के एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता गोला फेंक खिलाड़ी तजिंदरपाल सिंह तूर का अनुभव सकारात्मक रहा।
तूर ने बताया कि बाहर से कंटेनर छोटा दिखाई देता है, लेकिन जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं। उनके मुताबिक, अगर वह सीधे जापान पहुंचकर पहली बार ऐसे कमरे में रहते तो इस बात का असर उनके दिमाग पर एक-दो दिन तक रह सकता था।
जापान की व्यवस्था देखकर बनाए गए सिमुलेशन रूम
पटियाला में पुरुष और महिला खिलाड़ियों के लिए अलग-अलग दो सिमुलेशन कक्ष तैयार किए गए हैं। इन्हें तैयार करने से पहले खेल मंत्रालय और SAI की टीम ने जापान जाकर वहां की आवास व्यवस्था का जायजा लिया था।
खिलाड़ियों की सूची तैयार की गई है और वे बारी-बारी से कंटेनर में रुक रहे हैं। उन्हें रात भी वहीं बितानी होती है, ताकि अगली सुबह उन्हें पता हो कि इस तरह की व्यवस्था में अपनी दिनचर्या कैसे शुरू करनी है।
यह अभ्यास 28 अगस्त से शुरू हुआ था और अब तक करीब आठ खिलाड़ी कंटेनर में रहकर इसका अनुभव ले चुके हैं।
सीमा कालिरामणा को भी करना पड़ा एडजस्ट
राष्ट्रमंडल खेलों की कांस्य पदक विजेता चक्का फेंक खिलाड़ी सीमा कालिरामणा के लिए शुरुआती अनुभव थोड़ा मुश्किल रहा। उन्होंने बताया कि वह दो रात कंटेनर में रहीं।
थ्रो खिलाड़ियों को अभ्यास और उपकरणों के कारण अपेक्षाकृत ज्यादा जगह की जरूरत होती है, इसलिए उन्हें कमरे के हिसाब से थोड़ा समायोजन करना पड़ा। हालांकि दूसरे दिन वह सहज हो गईं और ठीक से सो पाईं।
जापान के आवास को लेकर चिंता हुई दूर
सीमा कालिरामणा के अनुसार, इस सिमुलेशन अभ्यास से जापान में आवास को लेकर उनकी आशंका काफी हद तक दूर हो गई है। अब खिलाड़ियों को यह चिंता नहीं रहेगी कि वहां उन्हें किस तरह के कमरे में रहना पड़ेगा या उन्हें कैसा महसूस होगा।
SAI का मानना है कि किसी लॉजिस्टिक समस्या का असर खिलाड़ी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। इसलिए पहले से ऐसे अनुभव देकर खिलाड़ियों को मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा है।
13 मीटर लंबे कंटेनर में हैं ये सुविधाएं
SAI ने सीमित जगह का अधिकतम इस्तेमाल करते हुए करीब 13 मीटर लंबे और 3 मीटर चौड़े कंटेनर तैयार किए हैं। इसमें दोनों सिरों पर दो-दो खिलाड़ियों के लिए बेडरूम जैसी जगह है और बीच में संकरा गलियारा है।
कंटेनर में दो स्प्लिट AC, छोटा लॉन्ड्री क्षेत्र, वॉशिंग मशीन, फ्रिज, सिंक वाला कॉम्पैक्ट किचन और बाथरूम की सुविधा है। बाथरूम में वॉश बेसिन, टॉयलेट और शॉवर के लिए अलग हिस्से बनाए गए हैं।
सामान रखने के लिए चार कैबिनेट हैं, जबकि बेड के नीचे भारी किट बैग रखने की जगह भी उपलब्ध है।
पुराने कंटेनरों का भी होगा इस्तेमाल
इस प्रयोग में पर्यावरणीय स्थिरता का भी ध्यान रखा गया है। पटियाला स्थित NSNIS में मौजूद इन कंटेनरों का इस्तेमाल कोविड-19 महामारी के दौरान भारोत्तोलन और एथलेटिक्स के उपकरण रखने के लिए किया गया था।
एशियाई खेलों के लिए सिमुलेशन अभ्यास पूरा होने के बाद इन्हें बेकार नहीं छोड़ा जाएगा। इन कंटेनरों को गेस्ट हाउस में बदलने की योजना है, जिसके लिए दो बेड हटाकर दो लोगों के साझा ठहरने के लिए कमरे तैयार किए जाएंगे।