पांच दिनों के विदेश दौरे से लौटने के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi आज एक अहम और लंबी मंत्रिपरिषद बैठक करने जा रहे हैं। करीब 11 महीने बाद होने वाली इस बड़ी बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक यह बैठक 4 से 5 घंटे तक चल सकती है, जिसमें केंद्र सरकार के सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य मंत्री शामिल होंगे। राजनीतिक गलियारों में संभावित कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं के बीच इस बैठक पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
बैठक में सरकार के कई बड़े मंत्रालय अपने कामकाज और सुधारों को लेकर प्रस्तुति देंगे। इनमें ऊर्जा, वित्त, रेलवे, वाणिज्य, श्रम, कृषि, वन एवं पर्यावरण, सड़क परिवहन, परमाणु ऊर्जा और डीपीआईआईटी जैसे मंत्रालय शामिल हैं। बताया जा रहा है कि सभी मंत्रालय पहले ही बीते दो वर्षों में किए गए सुधारों और योजनाओं की रिपोर्ट कैबिनेट सचिवालय को सौंप चुके हैं। यह प्रक्रिया प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर शुरू की गई थी।
सूत्रों के अनुसार बैठक में सरकार के भविष्य के एजेंडे, आर्थिक सुधारों और प्रशासनिक बदलावों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है। हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों के बाद यह पहली बड़ी मंत्रिपरिषद बैठक है, इसलिए इसके राजनीतिक मायने भी काफी अहम माने जा रहे हैं।
बैठक में पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और उसके भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर भी चर्चा होने की संभावना है। खासतौर पर ऊर्जा, विमानन, कृषि, उर्वरक, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर संकट के प्रभाव को कम करने की रणनीति तैयार की जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी मंत्रालयों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दे सकते हैं कि अंतरराष्ट्रीय संकट का असर आम नागरिकों पर कम से कम पड़े।
सरकार की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ-साथ इस बात पर भी चर्चा होगी कि योजनाओं को जमीनी स्तर पर और प्रभावी तरीके से कैसे लागू किया जाए। माना जा रहा है कि इस बैठक में आने वाले महीनों के लिए सरकार की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी और कई बड़े फैसलों का संकेत मिल सकता है।