नई दिल्ली। तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक अवमानना याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप है कि अध्यक्ष ने कांग्रेस में शामिल हुए बीआरएस (BRS) विधायकों की अयोग्यता याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई तीन महीने की समयसीमा में निर्णय नहीं दिया।
मामला सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष उठाया गया। याचिकाकर्ता वकील ने अदालत को बताया कि अध्यक्ष ने अब तक दोनों अयोग्यता याचिकाओं पर कोई विचार नहीं किया, जबकि संबंधित विधायक लगातार सदन में कार्य कर रहे हैं।
वकील ने यह भी तर्क दिया कि जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि यदि कोई विधायक प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा खींचने की कोशिश करता है, तो स्पीकर उसके विरुद्ध प्रतिकूल निष्कर्ष निकाल सकते हैं। लेकिन इसके बावजूद कार्यवाही आगे नहीं बढ़ी है।
अदालत की प्रतिक्रिया
मुख्य न्यायाधीश ने मामले को अगले सोमवार सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
जब वकील ने यह कहा कि मामला जानबूझकर मुख्य न्यायाधीश के सेवानिवृत्त होने तक (23 नवंबर) खींचा जा रहा है, तो सीजेआई गवई ने कहा:
“सुप्रीम कोर्ट 24 नवंबर के बाद भी चलता रहेगा।”
पृष्ठभूमि
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31 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश दिया था कि
कांग्रेस में शामिल हुए 10 बीआरएस विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर
तीन महीने के भीतर फैसला किया जाए। -
यह कार्यवाही संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल निरोधक कानून) के तहत चल रही है।
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अदालत ने पहले भी कहा था कि अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय में देरी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है।
मुख्य मुद्दा
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स्पीकर का निर्णय लंबित
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विधायकों की सदस्यता पर सवाल
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दल-बदल कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता