नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वकील विक्रम सिंह की उस याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई है, जिसमें उन्होंने हरियाणा पुलिस के स्पेशल टास्क फ़ोर्स (STF) द्वारा की गई अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए चुनौती दी है। यह मामला मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए पेश किया गया। याचिका की सुनवाई अब 12 नवंबर को की जाएगी।
वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत से तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि “एक वकील को केवल पेशेवर रूप से अपने मुवक्किल का प्रतिनिधित्व करने के लिए झूठे आरोप में फंसाया गया है।”
याचिका में हरियाणा सरकार, दिल्ली सरकार और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को पक्षकार बनाया गया है। जुलाई 2019 से दिल्ली बार काउंसिल में रजिस्टर्ड विक्रम सिंह इस समय फरीदाबाद जेल में बंद हैं।
6 नवंबर को दिल्ली की जिला अदालतों की कोऑर्डिनेशन कमेटी ने दावा किया कि सिंह को एक हत्या के मामले में झूठे तरीके से फंसाया गया है।
याचिका में मुख्य तर्क
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वकील का कहना है कि उन्होंने केवल एक सह-अभियुक्त का कानूनी प्रतिनिधित्व किया था।
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वकील-मुवक्किल संबंध को आपराधिक स्वरूप देने का प्रयास कानून के शासन पर आघात है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि एक हिरासत में बंद आरोपी पर हिरासत के दौरान हमले की शिकायत के बाद STF ने प्रतिशोध में गिरफ्तारी की।
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गिरफ्तारी बिना लिखित आधार और स्वतंत्र गवाह के की गई, जो संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 का उल्लंघन है।
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एक नवंबर को निचली अदालत द्वारा 14 दिन की न्यायिक हिरासत को ‘यांत्रिक और बिना किसी ठोस आधार’ वाला निर्णय बताया गया।
याचिका में फरीदाबाद पुलिस स्टेशन सेक्टर 8 में दर्ज हत्या के मामले में दर्ज सभी कार्यवाही रद्द करने और STF की कार्रवाई की न्यायिक जांच की मांग की गई है।