आज, 12 जून 2026 को शुक्र प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित यह व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में विधि-विधान से शिव आराधना करने पर जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख, समृद्धि एवं सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
🕉️ प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त
शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा के लिए आज प्रदोष काल का शुभ समय:
🕖 शाम 7:36 बजे से रात 9:40 बजे तक
इस दौरान भगवान शिव का जलाभिषेक करें, बेलपत्र अर्पित करें, शिव मंत्रों का जप करें और माता पार्वती की पूजा करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष काल में की गई पूजा विशेष फलदायी होती है।
📖 प्रदोष व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक निर्धन ब्राह्मणी अपने पुत्र के साथ अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रही थी। एक दिन उसे एक घायल युवक मिला, जिसे वह अपने घर ले आई और पुत्र समान उसका पालन-पोषण करने लगी। वह युवक वास्तव में विदर्भ राज्य का राजकुमार धर्मगुप्त था, जिसका राज्य शत्रुओं ने छीन लिया था।
बाद में ब्राह्मणी अपने पुत्र और धर्मगुप्त को लेकर ऋषि शांडिल्य के आश्रम पहुंची। ऋषि ने उन्हें भगवान शिव की भक्ति और प्रदोष व्रत का पालन करने की सलाह दी। ब्राह्मणी ने पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक प्रदोष व्रत रखना शुरू किया।
भगवान शिव की कृपा से राजकुमार धर्मगुप्त का विवाह गंधर्व कन्या अंशुमति से हुआ और बाद में गंधर्वों की सहायता से उसने अपना खोया हुआ राज्य पुनः प्राप्त कर लिया। कथा के अनुसार यह सब प्रदोष व्रत के पुण्य प्रभाव और भगवान शिव की कृपा का परिणाम था।
🌿 प्रदोष व्रत का महत्व
- भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
- आर्थिक और मानसिक परेशानियां दूर होती हैं।
- मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
- वैवाहिक जीवन में खुशहाली और सौभाग्य बढ़ता है।