कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पुरुषों के जैवलिन थ्रो फाइनल में भारत के युवा एथलीट यश वीर सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 85.41 मीटर का अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो फेंका और ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इस प्रदर्शन के साथ भारत ने जैवलिन थ्रो में डबल पोडियम हासिल किया, क्योंकि नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के सीजन बेस्ट थ्रो के साथ सिल्वर मेडल जीता।
यश वीर सिंह का यह सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं है। राजस्थान के जयपुर के रहने वाले यश ने शुरुआती दिनों में महंगे उपकरणों के बजाय बांस के भाले से खेतों में अभ्यास किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उनका सपना देश के लिए खेलना था और उन्होंने अपनी मेहनत से उस सपने को साकार किया।
यश के पिता राय सिंह खुद राष्ट्रीय स्तर के पूर्व जैवलिन थ्रो खिलाड़ी रह चुके हैं। उन्होंने बचपन से ही बेटे का मार्गदर्शन किया और लगातार मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। पिता की देखरेख में यश ने तेजी से प्रगति की और देश के सबसे प्रतिभाशाली जैवलिन खिलाड़ियों में अपनी पहचान बनाई।
यश वीर सिंह ने 2022 इंडियन अंडर-20 फेडरेशन कप में नीरज चोपड़ा का अंडर-20 नेशनल मीट रिकॉर्ड तोड़कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। उसी वर्ष उन्होंने 80 मीटर से अधिक दूरी तक भाला फेंककर भारतीय एथलेटिक्स में नया इतिहास रचा।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज जीतने के साथ ही यश वीर सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स में जैवलिन थ्रो में पदक जीतने वाले भारत के तीसरे खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले काशीनाथ नाइक ने 2010 में ब्रॉन्ज और नीरज चोपड़ा ने 2018 में गोल्ड तथा 2026 में सिल्वर मेडल जीता था।
बांस के भाले से अभ्यास शुरू करने वाले इस युवा खिलाड़ी ने आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन कर दिया है। यश वीर सिंह की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का बड़ा स्रोत है।