सांस लेने में परेशानी, दिल की धड़कन तेज होना, चक्कर आना, पसीना आना और अचानक घबराहट महसूस होना — ये सभी लक्षण पेनिक अटैक के संकेत हो सकते हैं। यह स्थिति तब होती है जब व्यक्ति को अचानक और तीव्र भय या चिंता का अनुभव होता है, भले ही कोई वास्तविक खतरा न हो। पैनिक अटैक कुछ मिनटों तक रहता है, लेकिन उस समय व्यक्ति को ऐसा महसूस हो सकता है जैसे उसे दिल का दौरा पड़ रहा हो या वह बेहोश हो जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या आज की तेज़ रफ्तार और तनावपूर्ण जीवनशैली में तेजी से बढ़ रही है।
पैनिक अटैक के पीछे कई कारण हो सकते हैं — जैसे अत्यधिक तनाव , चिंता विकार , नींद की कमी , नशे का सेवन , हार्मोनल असंतुलन और कुछ मामलों में आनुवांशिक प्रवृत्ति भी। जिन लोगों को लंबे समय से भावनात्मक तनाव या मानसिक दबाव रहता है, उनमें इसके होने की संभावना ज्यादा होती है। कभी-कभी अचानक कोई डरावनी घटना, आघात या चिंता बढ़ाने वाली स्थिति भी इसे ट्रिगर कर सकती है।
विशेषज्ञपेनिक अटैकसे बचाव के लिए महत्वपूर्ण उपाय सुझाते हैं। सबसे पहले, जीवनशैली में संतुलन बनाए रखना जरूरी है — नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, ध्यान (Meditation) और गहरी सांसों की तकनीक (Deep Breathing) से काफी राहत मिलती है। कैफीन, शराब और धूम्रपान से दूरी रखना भी फायदेमंद होता है। अगर बार-बार पैनिक अटैक हो रहे हों, तो मनोचिकित्सक या काउंसलर से संपर्क करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर दवाइयों की मदद से इस समस्या का प्रभावी इलाज संभव है।