अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में हर कुछ वर्षों में कोई ऐसा पिंड आता है जो वैज्ञानिकों की सभी धारणाओं को चुनौती दे देता है। इस बार यह भूमिका निभा रहा है 3I/ATLAS — एक रहस्यमयी अंतरतारकीय (interstellar) पिंड, जो 29 अक्टूबर को सूर्य के सबसे नज़दीकी बिंदु (पेरिहेलियन) पर पहुँचेगा। उस दिन यह सूर्य से लगभग 1.36 खगोलीय इकाई (AU) की दूरी पर होगा, यानी मंगल की कक्षा के लगभग बराबर।
नासा, यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) और जापान की JAXA जैसी कई अंतरिक्ष एजेंसियाँ इस रहस्यमय पिंड का गहराई से अध्ययन कर रही हैं, क्योंकि इसके असामान्य गुणधर्म, संरचना, और पूंछ की दिशा में अजीब बदलाव अब तक देखे गए किसी भी धूमकेतु से मेल नहीं खाते।
क्या है 3I/ATLAS?
3I/ATLAS एक अंतरतारकीय ऑब्जेक्ट (Interstellar Object) है — यानी ऐसा पिंड जो हमारे सौरमंडल के बाहर से आया है और सूर्य के पास से गुजरते हुए फिर बाहर निकल जाएगा।
इससे पहले केवल दो अंतरतारकीय पिंडों की खोज हुई थी — ‘Oumuamua (2017) और 2I/Borisov (2019)। 3I/ATLAS तीसरा ऐसा ऑब्जेक्ट है, इसलिए इसके नाम में “3I” (Third Interstellar) जोड़ा गया है।
क्यों है यह इतना रहस्यमयी?
जब इसे पहली बार खोजा गया, तो खगोलविदों ने पाया कि इसकी पूंछ की दिशा असामान्य है।
सामान्य धूमकेतुओं में सौर विकिरण और सौर वायु गैस और धूल को बाहर की ओर धकेलते हैं, जिससे पूंछ हमेशा सूर्य से दूर बनती है।
लेकिन 3I/ATLAS की पूंछ सूर्य की ओर बढ़ रही थी — यानी “anti-solar tail” के बजाय “pro-solar tail” दिखी।
सितंबर 2025 तक कैनरी द्वीप समूह स्थित नॉर्डिक ऑप्टिकल टेलीस्कोप के वैज्ञानिकों ने रिपोर्ट किया कि इस पूंछ ने अब दिशा बदल ली है और वह सामान्य धूमकेतु की तरह सूर्य से दूर जा रही है। यह बदलाव अब तक किसी अन्य धूमकेतु में नहीं देखा गया था, जिसने वैज्ञानिकों को चकित कर दिया।
निकेल टेट्राकार्बोनिल की मौजूदगी ने बढ़ाई हैरानी
और भी हैरान करने वाली बात तब सामने आई जब वैज्ञानिकों ने इसके स्पेक्ट्रल विश्लेषण (spectral analysis) में निकेल टेट्राकार्बोनिल (Ni(CO)₄) नामक यौगिक के संकेत पाए।
यह एक औद्योगिक रासायनिक पदार्थ है, जिसका उपयोग पृथ्वी पर धातु शोधन (metal refining) में किया जाता है।
प्राकृतिक रूप से यह यौगिक किसी ज्ञात धूमकेतु में नहीं पाया गया है।
इस खोज के बाद कुछ विशेषज्ञों ने यह संभावना जताई कि 3I/ATLAS प्राकृतिक न होकर कृत्रिम वस्तु भी हो सकता है — यानी किसी उन्नत सभ्यता द्वारा भेजा गया यान। हालांकि अभी तक इस दावे की कोई ठोस पुष्टि नहीं हुई है।
हबल टेलीस्कोप की तस्वीरें और आकार का अनुमान
हबल स्पेस टेलीस्कोप से ली गई तस्वीरों के अनुसार, 3I/ATLAS के केंद्र में एक बर्फीला नाभिक (icy nucleus) है, जिसके चारों ओर आँसू के आकार (tear-shaped) की धूल की परत बनी हुई है।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसका व्यास 440 मीटर से 5.6 किलोमीटर के बीच हो सकता है।
इसकी कक्षा (orbit) “हाइपरबोलिक (hyperbolic)” है — जिसका अर्थ है कि यह सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से बंधा नहीं है और 29 अक्टूबर को सूर्य के पास से गुजरने के बाद हमेशा के लिए सौरमंडल से बाहर चला जाएगा।
क्या पृथ्वी के लिए खतरा है?
नासा के अनुसार, 3I/ATLAS पृथ्वी के लिए कोई खतरा नहीं है। यह हमारे ग्रह से सैकड़ों लाख किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा।
हालाँकि, इसका पेरिहेलियन पासेज वैज्ञानिकों के लिए एक अद्भुत अवसर है — अंतरतारकीय पदार्थों, संरचना और संभावित कृत्रिमता के अध्ययन का।
29 अक्टूबर को क्या होगा?
29 अक्टूबर को यह सूर्य के सबसे करीब होगा, और उस समय इसकी गतिविधियों का रियल-टाइम अवलोकन किया जाएगा।
दुनिया भर के वेधशालाएँ और स्पेस एजेंसियाँ इसकी पूंछ, चमक और रासायनिक संकेतों को मापेंगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह प्राकृतिक धूमकेतु, रहस्यमयी पिंड, या किसी सभ्यता का छोड़ा हुआ ऑब्जेक्ट तो नहीं।
निष्कर्ष:
3I/ATLAS सिर्फ एक अंतरतारकीय पिंड नहीं, बल्कि यह हमारे सौरमंडल और ब्रह्मांड के रहस्यों को खोलने की कुंजी साबित हो सकता है।
इसके असामान्य व्यवहार ने विज्ञान जगत को एक नई बहस दे दी है — क्या हम वाकई ब्रह्मांड में अकेले हैं, या कहीं और से कोई संकेत हमें देख रहा है?