हर बच्चा अपने आप में अलग और खास होता है। कोई बहुत सवाल पूछता है, कोई एक जगह टिककर नहीं बैठता, तो कोई दिनभर नई चीजें सीखने की कोशिश करता रहता है। अक्सर माता-पिता इन आदतों को शरारत या जिद समझकर बच्चों को डांट देते हैं, लेकिन चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट का कहना है कि कई बार यही आदतें बच्चे के तेज दिमाग और बेहतर सीखने की क्षमता का संकेत हो सकती हैं।
चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट श्वेता गांधी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा कर बच्चों की कुछ ऐसी आदतों के बारे में बताया है, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक, इन संकेतों का मतलब यह नहीं कि हर बच्चा “जीनियस” है, लेकिन ये उसके सीखने, सोचने और जिज्ञासु स्वभाव को जरूर दर्शा सकते हैं।
1. हर समय सवाल पूछना
अगर आपका बच्चा हर छोटी-बड़ी बात पर सवाल करता है और नई चीजों के बारे में जानने की उत्सुकता दिखाता है, तो उसे बार-बार चुप कराने की बजाय उसकी जिज्ञासा को प्रोत्साहित करें। एक्सपर्ट के अनुसार ऐसे बच्चे तेजी से सीखते हैं और उनकी सोचने-समझने की क्षमता बेहतर होती है।
2. एक जगह ज्यादा देर तक न बैठ पाना
कुछ बच्चे लगातार एक्टिव रहते हैं और एक जगह शांत बैठना उन्हें पसंद नहीं होता। इसे हमेशा गलत व्यवहार नहीं माना जाना चाहिए। कई बच्चों का दिमाग शारीरिक गतिविधियों के दौरान बेहतर तरीके से काम करता है। इसलिए हर बार उन्हें डांटना सही नहीं है।
3. दिन में सोना पसंद न करना
श्वेता गांधी के अनुसार, कुछ बच्चों का दिमाग इतना सक्रिय होता है कि वे आराम करने की बजाय नई चीजें सीखने और आसपास की दुनिया को समझने में ज्यादा रुचि लेते हैं। ऐसे बच्चे दिन में कम सोना पसंद कर सकते हैं।
4. हर चीज में नई कल्पना करना
अगर बच्चा खिलौनों या सामान्य वस्तुओं से नई कहानियां बनाता है, अलग-अलग तरीके से खेलता है या अपनी कल्पनाओं की दुनिया तैयार करता है, तो यह उसकी क्रिएटिव सोच का संकेत हो सकता है। ऐसे बच्चों की रचनात्मक क्षमता को बढ़ावा देना चाहिए।
5. भावनाओं को खुलकर व्यक्त करना
जो बच्चे अपनी खुशी, गुस्सा, दुख या उत्साह खुलकर व्यक्त करते हैं, वे अक्सर भावनात्मक रूप से अधिक जागरूक होते हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि उनकी भावनाओं को समझना और उन्हें सही दिशा देना जरूरी है, बजाय इसके कि हर बार उन्हें चुप कराया जाए।
कब नहीं करनी चाहिए रोक-टोक?
चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट का कहना है कि यदि बच्चे का व्यवहार किसी को नुकसान नहीं पहुंचा रहा है और वह सिर्फ अपनी जिज्ञासा, रचनात्मकता या सीखने की इच्छा दिखा रहा है, तो हर छोटी बात पर रोक-टोक करने से बचना चाहिए। माता-पिता का सहयोग और सकारात्मक माहौल बच्चे के मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
हालांकि, केवल इन आदतों के आधार पर किसी बच्चे को “जीनियस” कहना सही नहीं होगा। हर बच्चे का विकास अलग गति से होता है। यदि व्यवहार को लेकर कोई गंभीर चिंता हो, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहता है।