नीदरलैंड्स में दक्षिणपंथी झटके के बाद राजनीतिक केंद्र की वापसी — D66 और फ्रीडम पार्टी में कांटे की टक्कर

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नीदरलैंड्स के संसदीय चुनावों में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है, जहां दक्षिणपंथी उभार के बाद देश अब फिर से राजनीतिक केंद्र की ओर लौटता दिखाई दे रहा है। उदारवादी D66 पार्टी और सुदूर दक्षिणपंथी फ्रीडम पार्टी (PVV) के बीच कड़ी टक्कर में, D66 98 प्रतिशत मतों की गिनती तक सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। दोनों दलों को 26-26 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि सेंटर-राइट VVD को 22, सोशलिस्ट-ग्रीन गठबंधन को 20 और क्रिश्चियन डेमोक्रेट्स को 18 सीटें मिलने की संभावना है।

150 सीटों वाली डच संसद में सरकार बनाने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को 75 से अधिक सीटों का बहुमत हासिल करना आवश्यक होता है। इस लिहाज़ से स्पष्ट है कि गठबंधन राजनीति एक बार फिर नीदरलैंड्स की दिशा तय करेगी।

इस चुनाव को फ्रीडम पार्टी और उसके नेता गीर्ट वाइल्डर्स के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। वाइल्डर्स, जो अपने इस्लाम विरोधी बयानों और सख्त आव्रजन नीतियों के लिए जाने जाते हैं, को इस बार 11 सीटों का नुकसान हुआ है। यह इस बात का संकेत है कि नीदरलैंड के मतदाता अब अतिवाद से हटकर व्यावहारिक और केंद्रित राजनीति की ओर लौटना चाहते हैं।

D66 के करिश्माई नेता रॉब जेटन, जो पहले ऊर्जा मंत्री रह चुके हैं, ने अपनी पार्टी की संभावित जीत को “ऐतिहासिक क्षण” बताया। उन्होंने कहा,

“हमने यह दिखा दिया है कि लोकलुभावन और अति-दक्षिणपंथी आंदोलनों को हराया जा सकता है। अब हमारी प्राथमिकता अन्य दलों के साथ मिलकर एक स्थिर और मजबूत गठबंधन सरकार बनाना है।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि D66 की यह सफलता यूरोपीय संघ समर्थक रुख, जलवायु नीति और समावेशी राजनीति पर आधारित है। जेटन का चुनावी नारा “यह संभव है” (It’s Possible) नीदरलैंड में व्याप्त निराशा और राजनीतिक विभाजन के बीच उम्मीद की नई लहर के रूप में देखा गया।

वहीं, वाइल्डर्स ने चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि उन्हें “एक अलग परिणाम की उम्मीद थी”, लेकिन वे “दूसरे स्थान पर आने को भी सम्मानजनक मानते हैं।”

पिछले वर्ष 2023 में, फ्रीडम पार्टी ने अप्रत्याशित रूप से चुनाव जीतकर सत्ता हासिल की थी, लेकिन सिर्फ 11 महीनों में उनकी सरकार गिर गई। प्रधानमंत्री पद के लिए वाइल्डर्स ने खुद की जगह पूर्व खुफिया प्रमुख डिक स्कोफ को आगे किया था, मगर उनकी सरकार लगातार विवादों और नीति असहमति के चलते टिक नहीं सकी।

वामपंथी मोर्चे की ओर से, फ्रैंस टिमरमैन्स, जो पूर्व यूरोपीय आयुक्त और ग्रीन-सोशलिस्ट गठबंधन के प्रमुख थे, ने चुनावी हार की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए पार्टी नेता पद से इस्तीफ़ा देने की घोषणा की। उन्होंने कहा,

“हम पर्याप्त लोगों को वोट देने के लिए राज़ी नहीं कर पाए। इसकी पूरी ज़िम्मेदारी मेरी है।”

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह परिणाम न केवल नीदरलैंड की राजनीति में संतुलन की वापसी का संकेत है, बल्कि पूरे यूरोप में अति-दक्षिणपंथी आंदोलनों के खिलाफ़ एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले हफ्तों में गठबंधन बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी, जो कई बार महीनों तक चल सकती है।

अगर D66 सफलतापूर्वक गठबंधन बना पाती है, तो रॉब जेटन नीदरलैंड के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं — एक ऐसा नेता जो देश को विभाजन से जोड़ने और लोकतांत्रिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करने का वादा कर रहा है।

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