उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए राजेन्द्र पाल गौतम को प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया है। इस फैसले को आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। राजेन्द्र पाल गौतम दलित राजनीति और सामाजिक न्याय की आवाज के रूप में जाने जाते हैं, ऐसे में उनकी नियुक्ति को कांग्रेस के दलित और पिछड़े वर्ग के वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश माना जा रहा है।
इस नियुक्ति के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या कांग्रेस बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती के लिए भविष्य में गठबंधन की संभावनाएं तलाश रही है। हालांकि कांग्रेस सांसद तनुज पूनिया ने साफ किया है कि उनकी और राजेन्द्र पाल गौतम की मायावती के आवास पर हुई मुलाकात को गठबंधन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मौजूदा गठबंधन समाजवादी पार्टी के साथ है और फिलहाल उसी के साथ मजबूती से आगे बढ़ रही है।
वहीं, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राजेन्द्र पाल गौतम की नियुक्ति संगठन को मजबूत करने और दलित समाज के बीच पार्टी की पकड़ बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है। दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषक इसे राहुल गांधी की उत्तर प्रदेश के लिए नई रणनीति और बदलते राजनीतिक समीकरणों के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
क्या यह सिर्फ संगठनात्मक बदलाव है या 2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस की बड़ी राजनीतिक चाल? जानिए इस रिपोर्ट में