उत्तराखंड में 10 साल में 500 मौतें: बढ़ते हाथी संघर्ष से फिर लौटेगा ‘हाथी मित्र’ मॉडल

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देहरादून। उत्तराखंड में मानव-हाथी संघर्ष अब वन विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। खासकर हरिद्वार, देहरादून और तराई के क्षेत्रों में हाथियों की बढ़ती आवाजाही ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले 10 सालों में राज्य में हाथियों के हमलों में 500 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई हाथियों की मौत करंट, सड़क हादसों और अवैध शिकार की वजह से हुई है।

ऐसे हालात में वन विभाग एक बार फिर ‘हाथी मित्र’ कॉन्सेप्ट को सक्रिय करने जा रहा है।

क्या है ‘हाथी मित्र’ मॉडल?

यह मॉडल कई साल पहले शुरू किया गया था, लेकिन समय के साथ यह धीमा हो गया। अब इसे फिर से सक्रिय किया जा रहा है।

इस मॉडल के तहत:

  • ग्रामीण और शहरी किनारे वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षित स्थानीय लोगों की टीम बनाई जाएगी

  • इनमें पूर्व महावत, हाथियों के स्वभाव को समझने वाले लोग और अनुभवी वनकर्मी शामिल होंगे

  • यह लोग हाथियों की गतिविधियों की निगरानी, मूवमेंट की सूचना और लोगों को अलर्ट करने का काम करेंगे

  • जरूरत पड़ने पर यह हाथियों को सुरक्षित दिशा में वापस जंगल की ओर मोड़ने में सहायता करेंगे

क्यों बढ़ रहा है संघर्ष?

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • जंगलों में सड़क, हाईवे, रेल लाइन और बस्तियों के विस्तार से हाथियों के पारंपरिक रास्ते (कॉरिडोर) बाधित हो गए हैं

  • हाथियों की याददाश्त बहुत तेज होती है, इसलिए जब पुराना रास्ता बंद मिलता है तो वे आबादी की ओर बढ़ जाते हैं

  • बारिश और बाढ़ के दौरान कई झुंड भोजन और सुरक्षित रास्ते की तलाश में गांवों में प्रवेश कर जाते हैं

उत्तराखंड में अभी करीब 2,000 से अधिक हाथी मौजूद हैं और 11 बड़े हाथी कॉरिडोर चिन्हित हैं। इनमें से कई जगह अवरोध पैदा हो चुके हैं।

वन विभाग का कहना

आर.के. मिश्रा, पीसीसीएफ (वन्यजीव) के अनुसार:

“हाथियों के व्यवहार में बदलाव दिखाई दे रहा है। ऐसे में हाथी मित्र स्थानीय स्तर पर सबसे मजबूत कड़ी बन सकते हैं। यह लोग हमारी फ्रंटलाइन फोर्स की तरह काम करेंगे और संघर्ष कम करने में मदद करेंगे।”

कैसे होगा लोगों को जागरूक?

  • गांवों में जागरूकता अभियान

  • हाथियों के करीब न जाने की सलाह

  • हाईवे पर चेतावनी बोर्ड

  • हाथियों के गुजरने वाले मार्गों का डेटा और डिजिटल मैपिंग

सबक स्पष्ट है: कॉरिडोर बचेंगे तो संघर्ष कम होगा

हाथी और मनुष्य दोनों को जीने की जगह चाहिए
जहां कॉरिडोर खुला और सुरक्षित होगा—
वहां न हाथी शहरों में आएंगे, न लोग खतरे में पड़ेंगे।

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