मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में जयपुर में हुई राजस्थान कैबिनेट बैठक में कर्मचारियों, महिलाओं, ग्रामीण जल आपूर्ति और यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने UCC बिल, प्रमोशन में अनुभव छूट, अनुकंपा नियुक्ति के दायरे का विस्तार और पांच स्तरीय ग्रामीण जल प्रबंधन व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए।
UCC बिल को मिली कैबिनेट की मंजूरी
राजस्थान कैबिनेट ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल को मंजूरी दे दी है। इस बिल का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनों को एक समान और पारदर्शी व्यवस्था देना है।
मुख्य प्रावधान:
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विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य होगा।
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UCC लागू होने के बाद विवाह का 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा।
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बहुविवाह पर प्रतिबंध रहेगा।
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लिव-इन संबंधों के पंजीकरण का प्रावधान किया गया है।
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लिव-इन संबंध से जन्मे बच्चों को कानूनी अधिकार मिलेंगे।
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अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय पर यह कानून लागू नहीं होगा।
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पंजीकरण नहीं कराने पर 10,000 रुपये और नोटिस के बाद भी उल्लंघन करने पर 25,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।
कर्मचारियों के प्रमोशन में 2 साल की राहत
राज्य कर्मचारियों को पदोन्नति के लिए आवश्यक अनुभव में 2 वर्ष की सशर्त छूट देने का फैसला लिया गया है। यह लाभ उन कर्मचारियों को वर्ष 2026-27 में मिलेगा, जिन्हें 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में भी इस प्रकार की छूट प्राप्त हुई थी। इसके लिए विभिन्न सेवा नियमों में संशोधन किया जाएगा, जिससे रिक्त पदों को भरने में मदद मिलेगी।
अब पुत्रवधू भी होगी अनुकंपा नियुक्ति की पात्र
कैबिनेट ने मृत सरकारी कर्मचारी के आश्रितों की सूची में पुत्रवधू को भी शामिल करने का निर्णय लिया है। इस संशोधन के बाद पात्र पुत्रवधू को अनुकंपा नियुक्ति मिल सकेगी, जिससे परिवार के भरण-पोषण में सहायता मिलेगी।
नौकरी छोड़ने पर ट्रेनिंग खर्च ही वसूला जाएगा
राजस्थान सेवा नियम, 1951 में संशोधन के बाद यदि कोई कर्मचारी राजपत्रित पद पर नियुक्ति के बाद प्रशिक्षण अवधि या उसके दो वर्ष के भीतर नौकरी छोड़ता है, तो उससे केवल प्रशिक्षण व्यय की वसूली होगी। वेतन और भत्तों की वसूली नहीं की जाएगी। वहीं राज्य या केंद्र सरकार के अन्य विभाग में नई नियुक्ति पर पद त्यागने वालों से प्रशिक्षण खर्च भी नहीं लिया जाएगा।
चाइल्ड केयर लीव और मातृत्व अवकाश में बदलाव
सिंगल महिला कर्मचारियों को अब चाइल्ड केयर लीव एक कैलेंडर वर्ष में 3 के बजाय 6 चरणों में मिल सकेगी। इसके अलावा सरोगेसी के मामलों में सरोगेट मदर को 180 दिन और कमीशनिंग मदर को 90 दिन का मातृत्व अवकाश देने का निर्णय लिया गया है।
ग्रामीण जल आपूर्ति के लिए बनेगा 5-स्तरीय ढांचा
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति और निगरानी को मजबूत करने के लिए ग्राम पंचायत, क्लस्टर समिति, ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर 5-स्तरीय संस्थागत व्यवस्था बनाई जाएगी। ग्राम पंचायत और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC) स्थानीय संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निभाएंगी, जबकि प्रत्येक 5–6 ग्राम पंचायतों पर क्लस्टर समिति तकनीकी सहयोग प्रदान करेगी।