कश्मीर में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 200 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी, सैकड़ों लोग हिरासत में

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जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी समर्थन नेटवर्क पर नकेल कसने के लिए पुलिस ने बुधवार को एक बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चलाया। इस अभियान के तहत कुलगाम, सोपोर, अवंतीपोरा और गांदरबल जिलों में 200 से अधिक ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की गई। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (JeI) और उसके सहयोगियों के खिलाफ चल रही जांच का हिस्सा है।

पुलिस के अनुसार, पिछले चार दिनों में केवल कुलगाम जिले में ही 400 से ज्यादा घेराबंदी और तलाशी अभियान (CASO) चलाए गए हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों से पूछताछ की गई और सैकड़ों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने बताया कि इस छापेमारी में कई आपत्तिजनक सामग्री, डिजिटल उपकरण, दस्तावेज़ और मुद्रित सामग्री बरामद की गई है, जो सीधे प्रतिबंधित संगठन से जुड़ी हैं। इन सामग्रियों को अब फॉरेंसिक विश्लेषण के लिए भेजा गया है।

सूत्रों के मुताबिक, यह अभियान एक “पूर्व-आक्रमणकारी कार्रवाई (pre-emptive strike)” है, जिसका उद्देश्य आतंकवादी संगठनों और उनके समर्थन नेटवर्क को दोबारा संगठित होने से रोकना है। अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में फरीदाबाद और सहारनपुर में पकड़े गए आतंकवादी मॉड्यूल और लाल किला विस्फोट मामले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी थी। हालांकि पुलिस ने यह स्पष्ट किया कि मौजूदा छापेमारी का उन घटनाओं से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

सोपोर जिले में भी बुधवार तड़के आतंकवाद-रोधी अभियानों के तहत 30 से अधिक जगहों पर छापे मारे गए। पुलिस ने कहा कि कई व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे किसी गैरकानूनी या विध्वंसक गतिविधि में शामिल हैं या नहीं। इसी तरह अवंतीपोरा और गांदरबल में भी  जमात-ए-इस्लामी  से जुड़े लोगों पर कार्रवाई की गई।

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस अभियान को अपनी “सतत निवारक रणनीति” का हिस्सा बताया है, जिसका उद्देश्य आतंकवादी और अलगाववादी पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह समाप्त करना है। इसमें न केवल आतंकवाद के वैचारिक और वित्तीय नेटवर्क को काटने की कोशिश की जा रही है, बल्कि क्षेत्र में शांति और सामान्य स्थिति बनाए रखने के प्रयास भी शामिल हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, बीते सप्ताह भर में 1,500 से अधिक लोगों को पूछताछ के लिए उठाया गया है, और जांच एजेंसियाँ अब एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही हैं ताकि भविष्य में किसी भी आतंकी पुनर्गठन की संभावना को रोका जा सके।

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