वे जरूरी बातें, जो हैं आपके अधिकार, लेकिन ज्यादातर लोग हैं इससे अनजान

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अपने मौलिक अधिकारों के बारे में अधिकतर लोगों को पता होता है, लेकिन कई ऐसे अधिकारी भी हैं, जो हमारे बहुत काम के हैं, लेकिन इनके बारे में कम ही लोग जानते हैं।

भारत की संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को भारत के संविधान को अपनाया था और यह 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ था। इसी वजह से 26 नवंबर का दिन संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2015 में हुई थी। भारतीय संविधान नागरिकों को कई तरह के अधिकार देता है और उनकी रक्षा भी करता है। अधिकतर नागरिक अपने मौलिक अधिकारों के बारे में जानते हैं, लेकिन कई ऐसी भी अधिकार हैं, जो आम आदमी के लिए बड़े काम के हैं, लेकिन कम ही लोग इस बारे में जानते हैं। यहां हम ऐसे ही कुछ अधिकारों के बारे में बता रहे हैं।

मुफ्त कानूनी सहायता का अधिकार: संविधान के आर्टिकल 39ए के तहत यदि आप गरीब हैं और आपराधिक मामले में आरोपी हैं या कोई मुकदमा लड़ना चाहते हैं, तो राज्य आपको मुफ्त वकील देगा। सुप्रीम कोर्ट ने हुसैनारा खातून केस (1979) और खातून बनाम बिहार राज्य केस में इसे मौलिक अधिकार माना है।

तुरंत न्याय पाने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने कई केसों जैसे हुसैनारा खातून, कादरा पहाड़िया आदि में कहा है कि लंबे समय तक जेल में बंद रहना या मुकदमा लटकाना आर्टिकल 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है। अगर आप बेगुनाह साबित होते हैं और सालों जेल में रहे, तो आपको मुआवजा मिल सकता है। गिरफ्तारी के समय पुलिस आपको 24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करेगी और गिरफ्तारी के कारण लिखित में बताने होंगे। इसके साथ ही आपके परिवार या मित्र को सूचित करना जरूरी है।

मेडिकल जांच का अधिकार: पुलिस स्टेशन में अरेस्ट रजिस्टर में एंट्री अनिवार्य है। उल्लंघन पर पुलिस पर केस चल सकता है।

साइलेंट रहने का अधिकार: आपसे पूछताछ के दौरान आप चुप रह सकते हैं। कोई आपको जबरदस्ती बयान देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। आर्टिकल 20 (3) (स्व-अपराधीकरण से संरक्षण)। आपको चुप रहने का अधिकार देता है। यह नियम भारत के अलावा भी दुनिया के कई देशों में लागू है।

FIR कॉपी मुफ्त में लेने का अधिकार: शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्ति को एफआईआर की कॉपी तुरंत मुफ्त में देनी होती है। मना करने पर मजिस्ट्रेट से शिकायत कर सकते हैं।

पुलिस थाने में महिलाओं के लिए महिला कांस्टेबल की मौजूदगी: रात 6 बजे के बाद महिला को गिरफ्तार करने के लिए महिला पुलिसकर्मी होना जरूरी है। नहीं तो गिरफ्तारी अवैध मानी जा सकती है।

सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने परमानंद कटारा बनाम भारत सरकार (1989) केस में कहा है कि किसी भी सरकारी अस्पताल में इमरजेंसी में मरीज को भर्ती करने से मना नहीं किया जा सकता (चाहे आधार कार्ड हो या न हो)। मना करने पर डॉक्टर/अस्पताल पर केस चल सकता है।

RTI के तहत खुद के बारे में जानकारी मांगने का अधिकार: आप पुलिस, इनकम टैक्स, पासपोर्ट ऑफिस आदि से अपनी फाइल की कॉपी मांग सकते हैं। वे मना नहीं कर सकते (सिवाय बहुत संवेदनशील मामलों के)।

जेल में बंद कैदी का वोट डालने का अधिकार: अंडरट्रायल कैदी (जिनका ट्रायल चल रहा है) वोट डाल सकते हैं। जिनको सजा हो चुकी है वो अपराधी वोट नहीं डाल सकते।

पुलिस द्वारा तलाशी के दौरान गवाह का अधिकार: आपके घर या गाड़ी की तलाशी के समय दो स्वतंत्र गवाह होने चाहिए। बिना गवाह के जब्ती अवैध हो सकती है।

महिला को गुजारा भत्ता का अधिकार: शादीशुदा और तलाकशुदा महिलाओं के अलावा पांच साल से ज्यादा समय तक लिव इन में रहने वाली महिलाएं भी गुजारा भत्ता पाने की हकदार होती हैं। उन्हें पति की आय का एक तिहाई हिस्सा गुजारा भत्ता के रूप में मिल सकता है।

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