आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की जनता पर महंगाई और टैक्स का दबाव अब और बढ़ने वाला है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए पाकिस्तान को पेट्रोलियम टैक्स से 1 लाख 73 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य दिया है। यह मौजूदा बजट लक्ष्य से करीब 25 हजार 900 करोड़ रुपये ज्यादा है।
आईएमएफ ने पाकिस्तान के फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (FBR) के लिए भी सख्त शर्तें लागू कर दी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान पिछले दो वर्षों से अपना राजस्व लक्ष्य पूरा करने में नाकाम रहा है, जिसके बाद अब आईएमएफ ने निगरानी और कड़ी कर दी है।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र और प्रांतीय सरकारों को मिलकर करीब 86 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाना होगा। इसके लिए केंद्र सरकार नए टैक्स उपाय लागू करेगी, जबकि राज्य सरकारें सेवाओं पर सेल्स टैक्स बढ़ाने और कृषि आयकर वसूलने की दिशा में कदम उठाएंगी।
पाकिस्तान का आगामी केंद्रीय बजट 17 लाख 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है, जो मौजूदा संशोधित बजट से लगभग 9 प्रतिशत ज्यादा होगा। वहीं रक्षा बजट भी बढ़ाकर करीब 2 लाख 66 हजार 500 करोड़ रुपये किए जाने की संभावना है।
आईएमएफ ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए एफबीआर को 15 लाख 27 हजार करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य दिया है। इस बार केवल लक्ष्य तय नहीं किया गया है, बल्कि इसे “क्वांटिटेटिव परफॉर्मेंस क्राइटेरिया” का दर्जा दिया गया है। यानी अगर पाकिस्तान तय लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया, तो उसे आईएमएफ के एग्जीक्यूटिव बोर्ड से विशेष छूट लेनी पड़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से ही महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक अस्थिरता का सामना कर रहे पाकिस्तान में नए टैक्स बोझ से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।