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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी और मिडिल ईस्ट में बढ़ती अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी क्रूड दोनों में 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ते हैं, तो कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर सकती है। सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है।
भारत के लिए यह स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल और व्यापार घाटा बढ़ सकता है। फिलहाल तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी जारी रहती है तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं।
हालांकि जून 2026 में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं, लेकिन कच्चे तेल की मौजूदा चाल आम लोगों की जेब पर असर डाल सकती है। अब सभी की नजर अंतरराष्ट्रीय बाजार और सरकार की अगली रणनीति पर टिकी है।