TMC के 20 बागी सांसद NCPI में क्यों जा रहे हैं? जानिए त्रिपुरा से शुरू हुई इस छोटी पार्टी की पूरी कहानी

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ई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद अब तक लगभग गुमनाम रही यह पार्टी अचानक राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है।

NCPI का गठन वर्ष 2023 में हुआ था और यह पार्टी चुनाव आयोग में पंजीकृत है। पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में चावमानु, कैलाशहर और अंबासा सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि चुनावी प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा और तीनों उम्मीदवारों को मिलाकर कुल 1,198 वोट ही मिले। किसी भी उम्मीदवार को 550 से अधिक वोट नहीं मिले थे।

चुनाव आयोग में जमा दस्तावेजों के अनुसार पार्टी ने अपने वित्तीय और ऑडिट रिकॉर्ड भी प्रस्तुत किए हैं। त्रिपुरा चुनाव में पार्टी को ‘सात किरणों वाली पेन की निब’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया था। हालांकि संगठनात्मक और जनाधार के स्तर पर पार्टी अब तक सीमित प्रभाव वाली मानी जाती रही है।

NCPI के राष्ट्रीय अध्यक्ष उत्तिया कुंडू हैं, जो पश्चिम बंगाल से आते हैं। हाल के महीनों में उनकी कुछ तस्वीरें और सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी नेतृत्व के खिलाफ उनके लगातार आक्रामक रुख ने उन्हें राज्य की राजनीति में पहचान दिलाई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि TMC के बागी सांसदों का NCPI में जाना केवल पार्टी बदलने का मामला नहीं है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए शक्ति संतुलन की कोशिश भी हो सकती है। यदि बड़ी संख्या में सांसद वास्तव में इस नए मंच के साथ आते हैं, तो NCPI को पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और राजनीतिक महत्व मिल सकता है।

हालांकि अभी यह देखना बाकी है कि यह विलय जमीनी राजनीति में कितना असर डालता है और क्या NCPI भविष्य में पश्चिम बंगाल तथा अन्य राज्यों में अपनी मौजूदगी मजबूत कर पाती है। फिलहाल TMC में बढ़ती अंदरूनी खींचतान और बागी नेताओं की नई राजनीतिक राह ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है।

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