एमके स्टालिन ने पीएम मोदी पर साधा निशाना, कहा — चुनावी लाभ के लिए ‘सस्ती राजनीति’ छोड़ें

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि भाजपा और प्रधानमंत्री चुनावी राज्यों में राजनीतिक लाभ पाने के लिए समाज में नफरत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। स्टालिन ने कहा कि मोदी ने अपने हालिया संबोधन में यह टिप्पणी की कि “डीएमके के लोग तमिलनाडु में बिहार के मजदूरों को परेशान कर रहे हैं,” जो पूरी तरह बेबुनियाद और भड़काऊ है। उन्होंने इस बयान को तमिलों और बिहारियों के बीच विभाजन पैदा करने की “सस्ती राजनीति” बताया।

स्टालिन ने प्रधानमंत्री के संबोधन का एक छोटा वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा कि यह बेहद दुखद है कि देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति चुनावी फायदे के लिए एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी की इस प्रवृत्ति की कड़ी निंदा करते हैं, जो तमिल लोगों के खिलाफ द्वेष फैलाने का काम कर रही है। चाहे बिहार हो या ओडिशा, भाजपा का यही तरीका है कि चुनावी राज्यों में लोगों को बांटकर राजनीतिक लाभ लिया जाए।”

बिहार में नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं, और राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि भाजपा और उसके सहयोगी दल वहां चुनावी माहौल को प्रभावित करने के लिए तमिलनाडु से जुड़े मुद्दों को उठाने की कोशिश कर रहे हैं। स्टालिन ने कहा कि प्रधानमंत्री को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं, न कि केवल भाजपा के। उन्होंने कहा कि इस तरह की विभाजनकारी टिप्पणियाँ प्रधानमंत्री के पद की गरिमा को ठेस पहुँचाती हैं।

मुख्यमंत्री ने भाजपा और प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे तमिल और बिहारी लोगों सहित एक वर्ग और दूसरे वर्ग के बीच दुश्मनी पैदा करने की कोशिश बंद करें। उन्होंने कहा कि देश आज कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है — आर्थिक असमानता, बेरोजगारी, महंगाई और जलवायु संकट — और इन मुद्दों पर ध्यान देने की बजाय भाजपा “वोट की राजनीति” में उलझी हुई है।

स्टालिन ने आगे कहा कि डीएमके हमेशा से सामाजिक न्याय, समानता और भाईचारे के सिद्धांतों पर आधारित राजनीति करती रही है, और किसी भी व्यक्ति या पार्टी को देश के नागरिकों के बीच वैमनस्य फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि भाजपा तमिलनाडु में कभी भी पैर नहीं जमा पाई है क्योंकि वहां की जनता सांप्रदायिकता के खिलाफ खड़ी है और हमेशा प्रगतिशील विचारों को अपनाती है।

द्रमुक प्रमुख ने अंत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को अपने शब्दों और कर्मों में उस गरिमा को बनाए रखना चाहिए जिसकी जनता उनसे अपेक्षा करती है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी सभी वर्गों को एकजुट करने की है, न कि उन्हें एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने की।

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