बिहार के अरवल जिले की रहने वाली डॉ. शुभांगी कुमारी ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पुणे स्थित प्रतिष्ठित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (AFMC) से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने भारतीय सेना की मेडिकल सेवा में लेफ्टिनेंट के रूप में नियुक्ति हासिल की है। उनकी सफलता से परिवार के साथ-साथ पूरे जिले में खुशी और गर्व का माहौल है।
मां शिक्षिका, पिता समाजसेवी
डॉ. शुभांगी अरवल जिले के कुर्था प्रखंड के लारी गांव की निवासी हैं। उनके पिता राकेश कुमार सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जबकि मां सविता देवी शिक्षिका हैं। उनके दादा शिवपूजन शर्मा एसबीएएन कॉलेज, लारी में प्रोफेसर रहे हैं और अब सेवानिवृत्त हैं।
परिवार का कहना है कि शुभांगी का सपना बचपन से ही डॉक्टर बनकर देश की सेवा करना था और उन्होंने उसी लक्ष्य को अपनी मेहनत का आधार बनाया।
गांव से शुरू हुआ सफर
शुभांगी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा लारी मध्य विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने DAV स्कूल, जहानाबाद से दसवीं की परीक्षा पास की। आगे की पढ़ाई के लिए वह विशाखापट्टनम स्थित श्री चैतन्य संस्थान गईं। मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी उन्होंने कोटा (राजस्थान) में की।
लगातार मेहनत के बाद उन्हें देश के प्रतिष्ठित AFMC, पुणे में प्रवेश मिला, जहां से उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की।
दूसरे प्रयास में मिली सफलता
मेडिकल प्रवेश परीक्षा में शुभांगी को पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में उन्होंने 650 अंक हासिल किए और AFMC में प्रवेश पाने का सपना पूरा किया।
एमबीबीएस पूरा करने के बाद उन्होंने भारतीय सेना की मेडिकल सेवा को चुना और अब लेफ्टिनेंट के रूप में देश की सेवा करेंगी।
गांव के लिए बनीं प्रेरणा
शुभांगी तीन बहनों में दूसरी हैं। उनकी बड़ी बहन पटना में शिक्षिका हैं। गांव के लोगों का कहना है कि शुभांगी बचपन से ही पढ़ाई में बेहद मेधावी थीं और हमेशा कुछ बड़ा करने का सपना देखती थीं।
ग्रामीणों ने उनकी उपलब्धि को पूरे इलाके के लिए गर्व का क्षण बताया। उनका कहना है कि लारी गांव से पहली बार किसी बेटी ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर यह मुकाम हासिल किया है, जिससे क्षेत्र की बेटियों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
डॉ. शुभांगी की सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो छोटे गांव से निकलकर भी देश की सर्वोच्च संस्थाओं तक पहुंचा जा सकता है।