हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे गीत हैं जो समय के साथ और भी खास बन गए। उन्हीं में से एक है फिल्म ‘दो रास्ते’ (1969) का सदाबहार गीत ‘बिंदिया चमकेगी, चूड़ी खनकेगी’। राजेश खन्ना और मुमताज पर फिल्माया गया यह गाना आज भी शादी-ब्याह, संगीत समारोहों और पारिवारिक आयोजनों की पहली पसंद बना हुआ है। 57 साल बाद भी इस गीत की लोकप्रियता बरकरार है।
लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस अमर गीत को अपनी आवाज देने से पहले स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने इसे गाने से इनकार कर दिया था।
पहले क्यों नहीं गाना चाहती थीं लता मंगेशकर?
बताया जाता है कि जब संगीतकार लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल यह गीत लेकर लता मंगेशकर के पास पहुंचे, तो उन्हें इसके बोल और शैली कुछ हल्के लगे। इसी वजह से उन्होंने शुरुआत में इस गाने को गाने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई और इसे रिकॉर्ड करने से मना कर दिया।
हालांकि बाद में जब उन्होंने यह गीत रिकॉर्ड किया, तो अपनी मधुर आवाज और खास अंदाज से इसमें ऐसी जान डाल दी कि यह हिंदी फिल्म संगीत के सबसे यादगार गीतों में शामिल हो गया। गाने के बीच उनकी खिलखिलाहट और मुस्कुराती हुई आवाज आज भी इसकी सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है।
मुमताज और राजेश खन्ना की जोड़ी ने बिखेरा जादू
फिल्म ‘दो रास्ते’ उस दौर की सबसे सफल फिल्मों में शामिल रही। राजेश खन्ना और मुमताज की जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। वहीं, ‘बिंदिया चमकेगी, चूड़ी खनकेगी’ गीत ने फिल्म की लोकप्रियता को और ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।
गाने के बोल, मधुर संगीत और दोनों कलाकारों की शानदार स्क्रीन केमिस्ट्री ने इसे हमेशा के लिए यादगार बना दिया।
मिला था फिल्मफेयर अवॉर्ड
इस गीत की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लता मंगेशकर को इसके लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका (Best Female Playback Singer) का सम्मान मिला था।
आज भी यह गीत रेडियो, टीवी, सोशल मीडिया और शादी समारोहों में उतना ही लोकप्रिय है, जितना अपने रिलीज के समय था। यह गाना न सिर्फ लता मंगेशकर के करियर के सबसे यादगार गीतों में गिना जाता है, बल्कि हिंदी सिनेमा के सदाबहार क्लासिक्स में भी अपनी खास जगह रखता है।