उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले युवाओं का भविष्य सरकारों की प्राथमिकता में नहीं था और उस समय केवल चुनिंदा क्षेत्रों के विकास पर ध्यान दिया जाता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले की सरकारों का एजेंडा “सैफई का विकास और बाकी सबकी अनदेखी” था। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने वर्षों तक युवाओं का शोषण किया और उन्हें अंधकार में धकेला, वही आज छात्रों के मुद्दे पर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं।
योगी आदित्यनाथ ने केंद्र सरकार द्वारा परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बड़े फैसले लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में ऐसे विधेयक को मंजूरी दी है, जिसके तहत नकल माफिया को 10 साल तक की सजा और ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संसद में पेश किया जाएगा और इसके लागू होने के बाद नकल माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नकल माफिया सपा और कांग्रेस की विरासत है। उन्होंने यह भी कहा कि NEET परीक्षा से जुड़े विवाद के बाद सरकार ने तय समय सीमा में दोबारा परीक्षा कराई और समय पर परिणाम जारी किए, जिससे छात्रों का एक साल खराब नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि NTA के 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त की गईं और कुछ लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।
यह पहला अवसर है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में छात्रों के आंदोलन पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने केंद्र सरकार के कदमों का समर्थन करते हुए कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए कठोर फैसले जरूरी हैं।
वहीं, छात्रों के आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी होने तक प्रदर्शन जारी रहेगा। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस बीच आंदोलनकारी प्रतिनिधियों और सरकार के बीच बातचीत का दौर भी जारी है।