केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने इसे आंदोलन की बड़ी जीत बताया, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि इस्तीफा उनकी प्रमुख मांगों में से एक था, लेकिन अभी तीन महत्वपूर्ण मांगें बाकी हैं।
अभिजीत दीपके ने कहा कि उनकी पहली मांग उन छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा देने की है, जिन्होंने कथित पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं से निराश होकर आत्महत्या की। दूसरी मांग यह है कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न की जाए और दर्ज किए गए सभी मामले वापस लिए जाएं। तीसरी मांग के तहत उन्होंने 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग करने वाले सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और छात्रों से सार्वजनिक माफी की मांग की।
दीपके ने कहा कि कई लोग दावा कर रहे थे कि इतनी “जिद्दी सरकार” कभी इस्तीफा नहीं देगी, लेकिन आंदोलन ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण और लगातार संघर्ष से बदलाव संभव है। उन्होंने कहा कि जब वह अमेरिका से भारत लौटे थे, तब कई लोगों ने उनसे पूछा था कि क्या देश में बदलाव संभव है, और अब उन्हें लगता है कि इस आंदोलन ने यह साबित कर दिया है कि लोकतांत्रिक तरीके से भी बड़े फैसले करवाए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर जनता बिना डरे अपनी आवाज उठाए और अपने अधिकारों के लिए डटी रहे, तो सरकार को जवाबदेह बनाया जा सकता है। दीपके ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि अभी उनकी बाकी मांगों पर भी सरकार को फैसला लेना होगा।
उन्होंने यह भी दोहराया कि 20 जुलाई की घटना के बाद छात्रों पर दर्ज सभी मामलों को वापस लिया जाए और प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग करने वाले पुलिस व सुरक्षा अधिकारियों पर उचित कार्रवाई की जाए। उनके अनुसार, आंदोलन की यह सफलता लोकतंत्र में जनभागीदारी और शांतिपूर्ण विरोध की ताकत को दर्शाती है।