कर्नाटक कांग्रेस में एक बार फिर दो गुटों में टकराव की स्थिति दिख रही है. शिवकुमार समर्थित विधायकों ने दिल्ली में डेरा डाला है और सीएम बदलने की मांग कर रहे हैं.
कर्नाटक में कुर्सी का नाटक एक बार फिर सुर्खियों में है. वजह है कि उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के करीबी माने जाने वाले एक मंत्री और कई विधायक गुरुवार को दिल्ली पहुंच गए. माना जा रहा है कि वे दिल्ली में पार्टी हाईकमान से मुलाकात कर मुख्यमंत्री बदलने की मांग रख सकते हैं. यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अभी हाल ही में अपना ढाई साल का कार्यकाल पूरा किया है.
जानकारी के मुताबिक गुरुवार तो 6 विधायकों ने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी मुलाकात की थी और शिवकुमार को सीएम बनाने का अपना मुद्दा उनके सामने रखा.
वापस लौट गए विधायक?
वहीं कुछ सूत्रों का यह भी कहना है कि दिल्ली में डेरा डाले सभी कांग्रेस विधायक मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात के बाद कल रात ही वापस लौट गए हैं इस समय केवल एक विधायक, राजे गौड़ा, दिल्ली में हैं.
कांग्रेस के भीतर सत्ता संतुलन का यह विवाद नया नहीं है. मई 2023 में चुनाव नतीजों के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच कड़ी खींचतान हुई थी. तब खबरें आई थीं कि ‘बारी-बारी से मुख्यमंत्री’ के फार्मूला पर सहमति बनी है, जिसके तहत ढाई साल बाद शिवकुमार को पद संभालना था. हालांकि पार्टी ने कभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की और सिद्धारमैया इस दावे को पहले ही खारिज कर चुके हैं. सिद्धारमैया ने साफ कहा है कि वे 5 साल का कार्यकाल पूरा करेंगे.
शिवकुमार खेमे ने दिल्ली में डाला डेरा
इसी बीच शिवकुमार के कुछ समर्थक नेता इस कथित वादे को लागू करने पर जोर दे रहे हैं. गुरुवार को मंत्री एन. चालुवरायस्वामी, विधायक इकबाल हुसैन, एच. सी. बालकृष्ण और एस. आर. श्रीनिवास दिल्ली रवाना हुए. कुछ दिन पहले 10 से ज्यादा एमएलसी भी दिल्ली में डेरा डाल चुके हैं और उन्होंने कांग्रेस महासचिवों से बातचीत की थी.
‘वादों से पीछे नहीं हटना चाहिए’
दूसरी ओर, सिद्धारमैया ने चामराजनगर में एक सभा में संकेत दिया कि उनकी स्थिति मजबूत है और वे आगे भी मुख्यमंत्री बने रहेंगे. इसी बीच शिवकुमार के भाई और पूर्व सांसद डी.के. सुरेश ने भी कहा कि सिद्धरमैया को अपने वादों से पीछे नहीं हटना चाहिए. उनसे जब पूछा गया कि क्या सिद्धरमैया शिवकुमार से किया वादा निभाएंगे, तो उन्होंने कहा उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है.
इस मामले पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया खेमे के केएन राजन्ना ने डिप्टी सीएम पर कटाक्ष किया. उन्होंने कहा कि AICC के पत्र में कही गई बातों पर अमल करना चाहिए, फिर दूसरों पर सवाल उठाने चाहिए.
कुल मिलाकर, कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता संतुलन को लेकर तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है और अब सबकी निगाहें दिल्ली में होने वाली बैठकों पर टिकी हैं.